‘फ्री हैंड’ की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को लताड़: याचिका खारिज करते हुए कहा— छात्रों के भविष्य का भी रखें ख्याल
- सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस को असीमित अधिकार यानी ‘फ्री हैंड’ देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि आंदोलन कर रहे युवाओं और छात्रों के अधिकारों व उनके भविष्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन को संवेदनशीलता बरतने और कानून-व्यवस्था के साथ मानवीय पहलुओं में संतुलन बनाए रखने की हिदायत दी।
CJI सूर्यकांत की भावुक टिप्पणी: युवाओं के सामने लंबा जीवन
- मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “हमारे सामने जो प्रदर्शनकारी खड़े हैं, वे युवा छात्र हैं। हमें उनके माता-पिता के बारे में भी सोचना होगा। इन युवाओं के आगे एक लंबा जीवन और करियर पड़ा है। मामूली विरोध-प्रदर्शनों के कारण उन्हें अनावश्यक रूप से अदालती चक्करों, मुकदमों और पुलिस की कार्रवाई में नहीं फंसाया जाना चाहिए।”
अधिकारों और कानून-व्यवस्था में संतुलन जरूरी
- शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का अधिकार नागरिकों का संवैधानिक हक है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए छात्रों पर कठोर कार्रवाई या ‘असीमित छूट’ का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि पुलिस के पास पहले से ही कानून के तहत पर्याप्त शक्तियां मौजूद हैं, ऐसे में बिना किसी सीमा के ‘फ्री हैंड’ देने की मांग न्यायसंगत नहीं है।
गंभीर अपराधियों को राहत नहीं, कानून के मुताबिक होगी कार्रवाई
- मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अदालत का यह रुख सामान्य छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के लिए है। पीठ ने स्पष्ट किया कि जो लोग गंभीर अपराधों में शामिल हैं या जिन पर संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं, उन पर कानून अपना काम करेगा। कुख्यात या आदतन अपराधियों के मामलों में पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी।
