इंग्लिश क्रिकेटर का बड़ा कदम: महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में छोड़ी विदेशी लीग, उठाया साहसिक कदम
- खेल और इंसानियत के बीच जब भी चयन की बात आती है, तो कुछ खिलाड़ी अपने नैतिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखते हैं। ऐसा ही एक साहसिक फैसला इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज ओली पोप (Ollie Pope) ने लिया है। अफगानिस्तान में महिलाओं और बालिकाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में ओली पोप ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में होने वाली अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (APL) के आगामी पहले सीजन के ड्राफ्ट से अपना नाम वापस ले लिया है।
अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति बना विरोध का कारण
- यह पूरा विवाद अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के शासनकाल के बाद से वहां महिलाओं और लड़कियों के मौलिक अधिकारों पर पाबंदियों और हो रहे अत्याचारों से जुड़ा है। साल 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ही इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने द्विपक्षीय सीरीज के स्तर पर अफगानिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने से दूरी बना रखी है, हालांकि वे आईसीसी (ICC) या मल्टी-टीम टूर्नामेंट्स में उनके खिलाफ खेलते हैं।
- एपीएल (APL) का यह पहला सीजन इस साल के अंत में यूएई में खेला जाना है, जिसकी शुरुआत 24 अक्टूबर से होनी है।
निजी फैसला और एनओसी (NOC) का पेंच
- ओली पोप इस ड्राफ्ट में इंग्लैंड के एकमात्र केंद्रीय अनुबंध (Central Contract) वाले खिलाड़ी थे। सूत्रों के अनुसार, उनका यह फैसला पूरी तरह से उनका व्यक्तिगत और नैतिक निर्णय था। इसमें इंग्लैंड क्रिकेट के प्रबंध निदेशक रोब की (Rob Key) का कोई प्रत्यक्ष दबाव नहीं था, हालांकि खिलाड़ियों को विदेशी लीग में खेलने के लिए ईसीबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होता है।
- इस महीने की शुरुआत में ईसीबी ने सैद्धांतिक रूप से यह तय किया था कि वह खिलाड़ियों को इस लीग के लिए एनओसी दे सकता है। रोब की ने खिलाड़ियों को इस पर अपना ‘नैतिक रुख’ तय करने की सलाह भी दी थी। रोब की और ओली पोप के बीच इस पर औपचारिक चर्चा होनी थी, लेकिन उससे पहले ही पोप ने लीग से हटने का कड़ा संदेश दे दिया।
अन्य खिलाड़ियों ने भी लिया हटने का फैसला
ओली पोप के अलावा इंग्लैंड के अन्य खिलाड़ियों जैसे विल स्मीड और डेविड विली ने भी इस टी20 लीग में हिस्सा न लेने का फैसला किया है।
हाल ही में बीबीसी टेस्ट मैच स्पेशल पॉडकास्ट पर बात करते हुए रोब की ने एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “कानूनी तौर पर खिलाड़ियों को किसी दूसरे टूर्नामेंट में जाने से रोका नहीं जा सकता, यह पूरी तरह से एक नैतिक फैसला होता है। खिलाड़ियों को सही और गलत का नैतिक निर्णय खुद लेने के लिए तैयार रहना चाहिए।”
ओली पोप और अन्य इंग्लिश खिलाड़ियों के इस कदम को खेल जगत में मानवाधिकारों और महिलाओं के समर्थन में एक बड़ा और सराहनीय संदेश माना जा रहा है।

