चुनावी साल में गैरसैंण से बड़ा संदेश: पर्वतीय विकास के एजेंडे के साथ धामी सरकार का तीन दिवसीय विधानसभा सत्र
- उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) एक बार फिर सियासी और विधायी हलचलों के केंद्र में आ गई है। राज्य में आगामी चुनावी रण से पहले गैरसैंण में 26 से 28 अक्टूबर के बीच तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है। कैबिनेट ने सत्र की तिथि और स्थान के निर्धारण के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत कर दिया है।
- इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक चुनावी वर्ष में पर्वतीय क्षेत्रों को साधने और क्षेत्र के चहुंमुखी विकास का कड़ा संदेश देने के रूप में देख रहे हैं। धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में गैरसैंण में आयोजित होने वाला यह छठा विधानसभा सत्र होगा।
राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं से जुड़ा है मुद्दा
- गैरसैंण में सत्र का आयोजन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं और पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास की आकांक्षाओं से जुड़ा एक संवेदनशील विषय रहा है। धामी सरकार लगातार गैरसैंण में सत्र आयोजित करने को प्राथमिकता देती रही है। इस कार्यकाल के दौरान भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में वर्ष 2023 में बजट सत्र, 2024 में मानसून सत्र, 2025 में बजट और मानसून सत्र, तथा इस वर्ष का बजट सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है।
पलायन, रोजगार और बुनियादी मुद्दों पर गरमा सकता है सदन
- चूंकि अगला साल चुनावी वर्ष है, ऐसे में अक्टूबर के अंत में होने वाले इस सत्र के दौरान सदन में जनहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े गंभीर मुद्दों पर तीखी चर्चा होने की पूरी संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन की समस्या, रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुदृढ़ सड़क संपर्क जैसे बुनियादी मुद्दे एक बार फिर सदन के पटल पर गूंज सकते हैं।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
- चुनावी बेला में गैरसैंण सत्र का आयोजन राजनीतिक और विकासात्मक—दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार इसके जरिए विकेंद्रीकृत शासन और पहाड़ी विकास के अपने विजन को जनता के सामने रखेगी, वहीं दूसरी तरफ पर्वतीय क्षेत्रों की जनता की उम्मीदों और अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती भी सरकार के सामने होगी।
