ईरान पर हमला: ट्रंप और नेतन्याहू के सामने क्यों है बड़ी दुविधा?
- अमेरिका और इजरायल में होने वाले चुनावों से ठीक पहले मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक नए और बड़े सैन्य अभियान को हरी झंडी देने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की घरेलू राजनीति और व्हाइट हाउस के आधिकारिक रुख के चलते इस पर अभी भी संशय बना हुआ है।
1. नेतन्याहू की चिंता: ‘पिकैक्स माउंटेन’ और परमाणु कार्यक्रम
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अमेरिकी नेतृत्व के साथ हुई फोन पर बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने एक बेहद संवेदनशील इजरायली खुफिया रिपोर्ट साझा की।
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इजरायल का दावा है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा खड़ा करने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है।
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इजरायल को मुख्य रूप से इस बात का डर है कि ईरान ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickax Mountain) को यूरेनियम एनरिचमेंट साइट के तौर पर सक्रिय कर सकता है। इसी खुफिया रिपोर्ट का हवाला देकर नेतन्याहू, ट्रंप पर तेहरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दबाव बना रहे हैं।
2. पेंटागन का समर्थन, लेकिन ट्रंप की टीम में हिचकिचाहट
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सैन्य तैयारी: पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ और यूएस सेंट्रल कमांड के अधिकारी इजरायली सैन्य रणनीतियों के समर्थन में नजर आ रहे हैं।
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ट्रंप का रुख: शुरुआती दौर में ट्रंप कुछ सीमित और सटीक हमलों (Precision Strikes) के पक्ष में झुकते दिख रहे थे, लेकिन अपनी कोर टीम से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने फिलहाल कदम पीछे खींच लिए हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर कोई बड़ा हमला नहीं किया जाएगा।
3. युद्ध से किसे नफा और किसे नुकसान?
इस संभावित युद्ध की टाइमिंग पूरी तरह से दोनों देशों के चुनावी समीकरणों से जुड़ी हुई है:
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इजरायल (27 अक्टूबर चुनाव): इजरायली चुनावों से ठीक पहले युद्ध छिड़ने से प्रधानमंत्री नेतन्याहू को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि ईरान के संभावित जवाबी हमलों के बीच सुरक्षा हालात का हवाला देकर इन चुनावों को आगे भी खिसकाया जा सकता है।
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अमेरिका (3 नवंबर मिडटर्म चुनाव): अमेरिकी मतदाताओं के बीच नया युद्ध बेहद अलोकप्रिय साबित हो सकता है। अगर अभी जंग शुरू होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी उम्मीदों को करारा झटका लग सकता है।
4. मिलिट्री हाई अलर्ट पर, लेकिन व्हाइट हाउस का खंडन जारी
- भले ही राजनीतिक स्तर पर असहमतियां हैं, लेकिन अमेरिका और इजरायल की सेनाओं को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि यदि ट्रंप कभी भी अपना मन बदलते हैं, तो तुरंत एक्शन लिया जा सके। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को बयां करते हुए कहा— “नेतन्याहू दोबारा ईरान में घुसना चाहते हैं.राष्ट्रपति ने उन्हें तैयार रहने को कहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई अंतिम प्रतिबद्धता तय हो गई है।”*
- दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने इन सभी मीडिया रिपोर्ट्स और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि चुनावों से पहले ईरान पर हमले का कोई विचार नहीं है। वहीं नेतन्याहू के कार्यालय ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

