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कमाई पर टैक्स का जाल: शेयर, गोल्ड, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी—जानें कहां कितनी है LTCG टैक्स की दर

  • हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर दिए गए बयान के बाद वित्तीय बाजार में भारी हलचल देखने को मिली। निवेशकों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या सरकार इन टैक्स नियमों में कोई बड़ा बदलाव करने जा रही है। हालांकि, वित्त मंत्री के बयान के बाद यह साफ हो गया कि बाजार में निवेश के अलग-अलग माध्यमों पर टैक्स के मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे।

यदि आप भी शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, गोल्ड या रियल एस्टेट में निवेश करते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किस एसेट पर कितना LTCG (लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन) टैक्स लगता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इसका पूरा समीकरण:

1. शेयर बाजार (Listed Stocks): क्या है नियम?

अगर आप किसी कंपनी के लिस्टेड इक्विटी शेयर को 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखते हैं, तो उससे होने वाला मुनाफा ‘लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन’ माना जाता है।

  • छूट की सीमा: एक वित्त वर्ष में शेयर बाजार से होने वाले ₹1.25 लाख तक के कुल लॉन्ग-टर्म गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता है।

  • टैक्स की दर: ₹1.25 लाख से ऊपर होने वाले मुनाफे पर 12.5% की दर से टैक्स (सेस और सरचार्ज के साथ) चुकाना होता है।

  • उदाहरण: यदि आपको सालभर में शेयरों पर कुल ₹2 लाख का फायदा हुआ, तो शुरुआती ₹1.25 लाख टैक्स-फ्री रहेंगे और बाकी बचे ₹75,000 पर 12.5% टैक्स लगेगा।

2. म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds): कैटेगरी के हिसाब से अलग नियम

म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स का दायरा इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार का फंड है:

  • इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड: इन पर भी शेयरों की तरह ही नियम लागू होते हैं। यानी 12 महीने से अधिक होल्डिंग पर ₹1.25 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है और उससे ऊपर के मुनाफे पर 12.5% LTCG देना होगा।

  • डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds): यदि आपने 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद डेट म्यूचुअल फंड खरीदे हैं, तो इनसे होने वाला पूरा फायदा ‘शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन’ माना जाता है। यानी इन्हें आप चाहे जितने लंबे समय तक रखें, मुनाफा आपके सामान्य इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्सेबल होगा (इसमें अब इंडेक्सेशन का पुराना फायदा नहीं मिलता)।

3. सोना (Gold): फिजिकल और डिजिटल में अंतर

सोने में निवेश करने पर टैक्स इस बात पर तय होता है कि आपने उसे किस रूप में खरीदा है:

  • फिजिकल गोल्ड (गहने या बिस्कुट): यदि आप सोने के गहने या बार को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो बेचने पर उस पर सीधे 12.5% की दर से बिना इंडेक्सेशन का LTCG लगेगा।

  • गोल्ड ETFs और गोल्ड म्यूचुअल फंड: चूंकि गोल्ड ETFs लिस्टेड सिक्योरिटीज हैं, इसलिए इन्हें 12 महीने से अधिक रखने पर लॉन्ग-टर्म माना जाता है, जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड्स के लिए 24 महीने की अवधि है।

  • विशेष नोट: सोने के मुनाफे पर शेयरों की तरह ₹1.25 लाख की सालाना छूट का फायदा नहीं मिलता है। सोने पर हुआ हर लॉन्ग-टर्म मुनाफा टैक्स के दायरे में आता है।

4. प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट (Real Estate)

जमीन, मकान या फ्लैट जैसी अचल संपत्ति को यदि 24 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखने के बाद बेचा जाए, तो उससे होने वाला लाभ LTCG कहलाता है।

  • नया नियम: संशोधित नियमों के अनुसार, प्रॉपर्टी के लॉन्ग-टर्म गेन पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स का प्रावधान है।

  • पुराने निवेशकों के लिए राहत: जो लोग 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी बेच रहे हैं, उनके लिए सरकार ने दो विकल्पों की तुलना करने की छूट दी है—पहला 12.5% (बिना इंडेक्सेशन के) और दूसरा 20% (इंडेक्सेशन के साथ)। निवेशक वह विकल्प चुन सकते हैं जिसमें टैक्स कम बने।

  • प्रॉपर्टी के मामलों में भी शेयरों की तरह ₹1.25 लाख की छूट का नियम लागू नहीं होता है। वहीं 24 महीने से कम समय में प्रॉपर्टी बेचने पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STGC) टैक्स लगता है।

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