Uttarakhand

किशाऊ बांध परियोजना पर आगे बढ़ी बात, उत्तराखंड को बिजली और जल प्रबंधन में मिल सकते हैं बड़े फायदे

  • किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है। यह टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की सहायक नदी है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार किशाऊ परियोजना में करीब 1,324 मिलियन घन मीटर लाइव स्टोरेज और 660 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता प्रस्तावित है। इसे अपर यमुना बेसिन की तीन प्रमुख स्टोरेज परियोजनाओं में शामिल किया गया है।
  • उत्तराखंड के लिए किशाऊ परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे बिजली उत्पादन के साथ-साथ यमुना बेसिन में पानी के बेहतर प्रबंधन से सिंचाई और अन्य जल जरूरतों को भी लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना से जुड़े जल और बिजली लाभों का असर केवल उत्तराखंड और हिमाचल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपर यमुना बेसिन के अन्य राज्यों को भी इससे फायदा मिलने की योजना है।
  • सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में शामिल किया गया है। ऐसी परियोजनाओं में सिंचाई और पेयजल घटक के लिए केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
  • उत्तराखंड के लिए बिजली उत्पादन भी इस परियोजना का एक अहम पहलू है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार किशाऊ से 660 मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रावधान है। इससे भविष्य में राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना से राज्य को मिलने वाली वास्तविक बिजली और अन्य लाभ संबंधित समझौतों एवं परियोजना के क्रियान्वयन के अनुसार तय होंगे।
  • परियोजना के आगे बढ़ने से सिंचाई, पेयजल और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी क्षेत्रीय स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। अपर यमुना बेसिन में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए किशाऊ, लखवाड़ और रेणुकाजी जैसी परियोजनाओं की योजना लंबे समय से बनाई गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के रिकॉर्ड में किशाऊ परियोजना को इसी व्यापक जल प्रबंधन व्यवस्था का हिस्सा बताया गया है।
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में भी उत्तराखंड से जुड़ी जल और ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर केंद्र के साथ समन्वय का मुद्दा लगातार सामने रहा है। उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार धामी के पास ऊर्जा, पेयजल और औद्योगिक विकास जैसे विभाग भी हैं।
  • किशाऊ परियोजना को लेकर पिछले वर्षों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती रही है। अपर यमुना नदी बेसिन बोर्ड के रिकॉर्ड में परियोजना से संबंधित अंतरराज्यीय मुद्दों और समझौते के मसौदे को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच बैठकों का उल्लेख भी मिलता है।
  • ऐसे में किशाऊ बांध परियोजना का आगे बढ़ना उत्तराखंड के लिए बिजली, जल भंडारण और क्षेत्रीय जल प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, परियोजना के वास्तविक लाभ निर्माण की प्रगति, स्वीकृतियों, अंतरराज्यीय समझौतों और अंतिम क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।

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