उत्तराखंड में फर्जी दाखिलों का बड़ा खेल: 100 दस्तावेजों के साथ कुलसचिव ने खोला मोर्चा, शासन से की शिकायत
- प्रदेश के निजी आयुर्वेद कॉलेजों में बिना नीट और काउंसलिंग के अवैध दाखिलों, बैकडेट नामांकन तथा परीक्षा प्रणाली में धांधली का मामला एक बार फिर गरमा गया है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को पत्र भेजकर निजी आयुष कॉलेजों की प्रवेश व्यवस्था से लेकर परीक्षा व मूल्यांकन प्रणाली तक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने दावों के समर्थन में उन्होंने शासन को 100 से अधिक दस्तावेज भी सौंपे हैं।
बिना नीट और काउंसलिंग के बांटी गईं सीटें
- कुलसचिव के अनुसार, सत्र 2018-19, 2023-24 और 2024 में भारत सरकार तथा NCISM के निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर अयोग्य अभ्यर्थियों को बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस में प्रवेश दिया गया। निजी संस्थानों ने बिचौलियों और शिक्षा माफिया की मदद से अयोग्य छात्रों को ‘बैकडोर एंट्री’ से डॉक्टर बनाने का जरिया बना लिया है, जिससे योग्य छात्रों का भविष्य और चिकित्सा क्षेत्र की साख खतरे में है।
ढाबे में भरी गईं कॉपियां, CCTV भी गायब
- पत्र में परीक्षा व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया गया है कि एक कॉलेज में परीक्षा के बाद ढाबे में उत्तर पुस्तिकाएं भरवाए जाने की शिकायत मिली थी, जिसके बाद केंद्र बदलना पड़ा। इसके अलावा, मूल्यांकन केंद्रों पर सीसीटीवी बंद रहने, निगरानी के बिना कॉपियां जांचने और आरटीआई से प्राप्त उत्तर पुस्तिकाओं में गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है।
बैकडेट नामांकन और फर्जी रोल नंबर
- विश्वविद्यालय में मजबूत काउंसलिंग सॉफ्टवेयर और सिस्टम न होने का फायदा उठाकर कई कॉलेजों में छात्रों के बैकडेट में नामांकन किए गए और बिना उचित दस्तावेजी सत्यापन के रोल नंबर जारी कर दिए गए।
आंदोलन, दबाव और प्रभार से मुक्ति की गुहार
- नियम विरुद्ध दाखिला पाने वाले छात्र परीक्षा कराने और डिग्री जारी करने की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ने तथा आत्मदाह के प्रयास जैसी घटनाओं से अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। गलत कार्यों को मिल रहे संरक्षण और मानसिक-शारीरिक तनाव का हवाला देते हुए कुलसचिव ने लिखा— “जहां सर्जरी की जरूरत है, वहां सर्जन का काम फिजिशियन नहीं कर सकता।” उन्होंने किसी अनहोनी से पहले खुद को कुलसचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने की मांग की है।
