National

मासूम को गुपचुप US ले जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आरोपी के माता-पिता के खिलाफ जारी हुआ लुकआउट सर्कुलर

  • एनआरआई (NRI) दंपतियों के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर होने वाले विवादों और भारतीय अदालतों के आदेशों की अनदेखी करने वालों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर कोई पार्टनर बच्चे को धोखे से विदेश ले जाता है, तो भारत में रह रहे उसके माता-पिता को भी इसके गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। अदालत ने कड़ा संदेश दिया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था की अवहेलना कर विदेश भागने की प्रवृत्ति पर अब सख्त अंकुश लगाया जाएगा।

मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द, दादा-दादी पर दोबारा प्रभावी हुआ LoC

एक साढ़े तीन साल की बच्ची को बिना मां की जानकारी के चुपचाप अमेरिका ले जाने से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ को जब यह भनक लगी कि आरोपी पिता के माता-पिता न्याय प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं और खुद विदेश भागने की ताक में हैं, तो कोर्ट ने तुरंत मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें उनके खिलाफ जारी ‘लुकआउट सर्कुलर’ (LoC) पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद अब दादा-दादी के खिलाफ LoC फिर से लागू हो गया है।

‘मासूम को मां के प्यार से वंचित रखना गलत’

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने गहरी चिंता जताते हुए कहा, “साढ़े तीन साल की बच्ची को पिता धोखे से अमेरिका ले गया। मां अपनी बेटी को वापस पाने के लिए दर-दर भटक रही है और उसकी हालत दयनीय है। हमें नहीं पता कि वह बच्ची वहां नौकरीपेशा पिता के साथ किन परिस्थितियों में रह रही है।” अदालत ने सवाल उठाया कि एक मासूम को उसकी मां के स्नेह और देखभाल से बेवजह वंचित क्यों रखा जाना चाहिए?

NRI पिता को 4 हफ्ते का अल्टीमेटम, दीं ये 3 शर्तें

अदालत ने बच्ची के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए एनआरआई पिता को सख्त निर्देश दिए हैं:

  1. 4 हफ्ते में वापसी: आरोपी पिता को चार सप्ताह के भीतर बच्ची को लेकर भारत लौटना होगा। आदेश न मानने पर भारत में रह रहे उसके माता-पिता के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।

  2. विकल्प: यदि पिता खुद भारत आने में असमर्थ है, तो उसे किसी सुरक्षित एस्कॉर्ट के जरिए बच्ची को भिजवाना होगा।

  3. मां के जाने पर कस्टडी: यदि बच्ची की मां खुद अमेरिका जाती है, तो पिता को तुरंत बच्ची की कस्टडी मां को सौंपनी होगी।

मामले की अगली सुनवाई एक महीने बाद तय की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *