फांसी से 24 घंटे पहले जेल में फोन पर निकाह, ईरान में प्रदर्शनकारी को अगले ही दिन दी गई मौत की सजा
- मध्य ईरान के इस्फहान शहर से मानवाधिकार और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के आरोप में गिरफ्तार 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी अलीरेजा सेपाही को 5 अक्टूबर की सुबह इस्फहान की सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। फांसी दिए जाने से ठीक पहले अलीरेजा ने जेल से ही फोन कॉल के जरिए दूसरी जेल में बंद अपनी 22 वर्षीय मंगेतर महशाद काशानी से धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार निकाह रचाया था। हालांकि, शादी की यह खुशी 24 घंटे भी नहीं टिक सकी।
जेल में रहकर ऑडियो कॉल के जरिए पूरी की निकाह की रस्म
- अब्दोररहमान बोरौमंद सेंटर (मानवाधिकार संगठन) के अनुसार, अलीरेजा और महशाद (जो खुद भी प्रदर्शनों के सिलसिले में जेल में बंद हैं) को प्रशासन ने आमने-सामने मिलने की अनुमति नहीं दी थी। अलीरेजा के वकील ने दोनों परिवारों की सहमति से एक ऑडियो कॉल का इंतजाम किया, जिसके जरिए दोनों ने कानूनी और धार्मिक तौर पर एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया। वकीलों को उम्मीद थी कि इस शादी के आधार पर सजा-ए-मौत पर कुछ समय के लिए रोक लग सकती है, लेकिन प्रशासन ने अपील खारिज कर दी और अगले ही दिन फांसी दे दी।
जुलाई में पड़ा था दिल का दौरा, टल गई थी सार्वजनिक फांसी
- संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्पेशल रिपोर्टर माई सातो के अनुसार, अलीरेजा को 28 जुलाई को ही एक चौक पर सार्वजनिक रूप से फांसी दी जानी थी। लेकिन फांसी के तख्ते पर ले जाए जाने से ठीक पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल से ठीक होकर जेल लौटने के बाद से ही अलीरेजा हर दिन मौत के खौफ में जी रहे थे।
निष्पक्ष ट्रायल पर उठे सवाल, मां भी काट रही हैं 5 साल की सजा
- अलीरेजा को 10 जनवरी को उनकी मां के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनकी मां फिलहाल 5 साल की जेल की सजा काट रही हैं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि अलीरेजा के खिलाफ मुकदमे में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां थीं। अदालत में ऐसे सीसीटीवी फुटेज भी अनदेखे कर दिए गए, जिनसे साबित होता था कि घटना के समय अलीरेजा मौके पर मौजूद ही नहीं थे।
अब तक 34 प्रदर्शनकारियों को दी जा चुकी है फांसी
- नॉर्वे स्थित एनजीओ ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ (IHR) के अनुसार, जनवरी में हुए हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में ईरान सरकार अब तक 34 लोगों को फांसी की सजा दे चुकी है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सरकार विरोधी आवाजों को दबाने के लिए न्याय प्रणाली का कड़ाई से इस्तेमाल किया जा रहा है। अलीरेजा को फांसी दिए जाने के बाद प्रशासन ने उनका शव परिजनों को सौंपने के बजाय इस्फहान से 200 किलोमीटर दूर काशान भेज दिया, जिससे परिवार की परेशानियां और बढ़ गईं।
