भारतीय डीजल की ग्लोबल मार्केट में धमक: 6.20 लाख बैरल निर्यात कर इस देश में बढ़ाया दबदबा
वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती मांग और कीमतों में उछाल के बीच भारत ने डीजल निर्यात (डीजल एक्सपोर्ट) के मामले में नया रिकॉर्ड कायम किया है। सितंबर महीने में भारत से डीजल का कुल निर्यात बीते एक साल के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर डीजल की आपूर्ति में आई कमी और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनरों ने विदेशी बाजारों में सप्लाई काफी बढ़ा दी है।
रोजाना 6.20 लाख बैरल निर्यात, यूरोप को सबसे बड़ी सप्लाई
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म ‘Kpler’ के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भारत से रोजाना औसतन 6.20 लाख बैरल डीजल का निर्यात किया गया। इस कुल आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा अकेला यूरोप पहुंचा।
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यूरोप: 2.80 लाख बैरल प्रति दिन (अगस्त की तुलना में करीब 80% अधिक)
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अफ्रीका: 2.00 लाख बैरल प्रति दिन
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एशिया: 50 हजार बैरल प्रति दिन
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अमेरिका: 40 हजार बैरल प्रति दिन
बाकी का लगभग 50 हजार बैरल प्रति दिन अन्य गंतव्यों को भेजा गया। आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के दौरान रूस को डीजल की कोई खेप नहीं भेजी गई।
मजबूत मार्जिन ने बढ़ाया रिफाइनरों का मुनाफा
- सितंबर के दौरान डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन (क्रैक स्प्रेड) में जबरदस्त तेजी देखी गई। Kpler के विश्लेषकों के अनुसार, दुबई क्रूड की तुलना में सिंगापुर डीजल क्रैक $60 प्रति बैरल से ऊपर चला गया था। विदेशों में डीजल बेचने पर मिल रहे शानदार मार्जिन के चलते ही भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने अपने उत्पादन और एक्सपोर्ट दोनों में तेज बढ़ोतरी की।
रिलायंस इंडस्ट्रीज बनी सबसे बड़ी निर्यातक
- भारत से होने वाले कुल डीजल एक्सपोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस की विशेष निर्यात-उन्मुख (Export-Oriented) रिफाइनरी यूनिट इस सप्लाई का मुख्य केंद्र रही।
- गौरतलब है कि सितंबर में सामान्य डीजल एक्सपोर्ट पर सरकार की ओर से करीब $37 प्रति बैरल का विंडफॉल टैक्स लागू था, जो कंपनियों के शुद्ध मुनाफे को प्रभावित करता है। हालांकि, रिलायंस की केवल निर्यात के लिए बनी जामनगर इकाई पर यह कर लागू नहीं होता, जिससे कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े पैमाने पर सप्लाई का सीधा लाभ मिला।

