धामी सरकार के फैसलों से और धारदार हुई भगवा राजनीति, कुंभ के शंखनाद के बीच उत्तराखंड में तेज हुई हिंदुत्व की सियासत
- हरिद्वार में आयोजित होने वाले आगामी कुंभ मेले के शंखनाद के साथ ही उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर पूरी तरह गर्माने लगी है। गंगा के घाटों से उठने वाली आस्था की ये लहरें सीधे तौर पर राज्य के राजनीतिक गलियारों तक अपनी गूंज छोड़ने के लिए तैयार हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पड़ रहे इस महाकुंभ को भारतीय जनता पार्टी अपनी वैचारिक और हिंदुत्व की राजनीति के सबसे बड़े मंच के तौर पर उपयोग करने की पूरी रणनीति बना रही है।
नीतिगत फैसलों से गढ़ी गई हिंदुत्व की नई इबारत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पिछले कार्यकाल और वर्तमान नीतियों पर नजर डालें तो साफ झलकता है कि सरकार ने अपनी प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल कर हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति को एक नया और ठोस कलेवर दिया है।
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समान नागरिक संहिता (UCC): देश के अन्य राज्यों से आगे निकलते हुए उत्तराखंड का स्वतंत्र भारत में पहला राज्य बनना, इस दिशा में सबसे बड़ा कदम रहा। भाजपा ने यूसीसी को सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि लैंगिक समानता, महिला अधिकारों और अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता की सबसे बड़ी जीत के रूप में पेश किया है।
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कड़े कानून और सांस्कृतिक पहचान: धर्मांतरण विरोधी कानून को अधिक सख्त बनाना और धार्मिक स्थलों के आसपास से अतिक्रमण हटाने की मुहिम को सरकार ने ‘देवभूमि‘ की मूल सांस्कृतिक पहचान और कानून-व्यवस्था की बहाली से जोड़कर जनता के बीच मजबूती से रखा है।
विकास और आस्था का संगम: धार्मिक पर्यटन पर जोर
- केवल कड़े कानूनों तक ही नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन और तीर्थस्थलों के कायाकल्प ने भी इस राजनीति को और धार दी है। चारधाम यात्रा के मार्गों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, मंदिरों तक सुगम पहुंच और तीर्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास—इन सभी ने सरकार को ‘विकास और आस्था’ के मॉडल को एक साथ आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर दिया है। सरकार की कोशिश इन तमाम उपलब्धियों को सनातन परंपराओं के सम्मान और देवभूमि की विशिष्ट पहचान के रूप में जनता के सामने रखने की है।
चुनावी वैतरणी पार करने का बड़ा जरिया बनेगा कुंभ
- आगामी कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं रहेगा, बल्कि यह भाजपा के लिए शासन की उपलब्धियों, वैचारिक पहचान और चुनावी संदेश को एक सूत्र में पिरोने का सबसे बड़ा अवसर होगा। पार्टी की योजना देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं और संतों के बीच देवभूमि के इस सांस्कृतिक संदेश को पहुंचाने की है।
- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कुंभ के भव्य आयोजन के जरिए पार्टी एक तीर से कई निशाने साधने की जुगत में है। एक तरफ जहां यह संतों और सनातन समाज के बीच सरकार की साख को और मजबूत करेगा, वहीं दूसरी तरफ आगामी चुनावों से पहले हिंदुत्व की सियासत को उसकी सबसे ऊंची धुरी पर स्थापित करने का काम भी करेगा।

