Uttarakhand

उत्तराखंड में बदले वाहन रजिस्ट्रेशन नियम, बाहरी नंबर की गाड़ियों पर नजर

  • Dehradun में दूसरे राज्यों से NOC लेकर लाए गए यात्री वाहनों के पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब ऐसे वाहन स्वामियों को पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराना होगा। मूल पते या पंजीकृत किरायानामे का स्थानीय पुलिस से सत्यापन हुए बिना देहरादून संभाग में वाहन का पंजीयन नहीं किया जाएगा। यह निर्णय हाल ही में सामने आए कुछ संदिग्ध मामलों के बाद लिया गया है।
  • आरटीओ (प्रशासन) ने स्पष्ट किया है कि 12 सीटर से अधिक क्षमता वाले यात्री वाहनों के पंजीकरण और परमिट से जुड़े सभी कार्य अब पूर्ण दस्तावेज सत्यापन के बाद ही किए जाएंगे। आदेश लागू होते ही आरटीओ कार्यालयों में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि कई आवेदन अधूरे दस्तावेजों के कारण लंबित हैं।
  • विभागीय जांच में पाया गया कि कुछ आवेदनों में पते और पहचान संबंधी दस्तावेजों में विसंगतियां थीं। इससे गलत जानकारी के आधार पर पंजीयन प्रमाण-पत्र जारी होने की आशंका बढ़ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए अब ‘सत्यापन पहले, सेवा बाद में’ नीति लागू की गई है।
  • नए निर्देशों के तहत यदि किसी फाइल में एक भी दस्तावेज अधूरा पाया गया तो आवेदन तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही एजेंटों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग का दावा है कि इस कदम से पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।

नई RTO गाइडलाइन के मुख्य बिंदु:

  • वाहन स्वामी/ऑपरेटर को स्थायी भवन स्वामित्व प्रमाण या पंजीकृत किरायानामा देना अनिवार्य।
  • स्थानीय पुलिस सत्यापन अनिवार्य।
  • फर्म के मामले में GST प्रमाण-पत्र आवश्यक।
  • संभागीय अधिकारी/निरीक्षक की संयुक्त तकनीकी व भौतिक जांच रिपोर्ट अनिवार्य।
  • वाहन के मूल रंग और भौतिक सत्यापन के रंग का उल्लेख जरूरी।
  • राज्य में नए वाहनों के लिए अधिकृत GPS सिस्टम अनिवार्य।
  • पिछले दो वर्षों के चालान की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
  • वाहन स्वामी की पिछले तीन वर्षों की आयकर रिटर्न (ITR) रिपोर्ट अनिवार्य।
इन सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही वाहन का ट्रांसफर या नया पंजीकरण किया जाएगा। परिवहन विभाग का कहना है कि इन सख्त नियमों से न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी अधिक सुरक्षित और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी।

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