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बिलासपुर में बड़ा रेल हादसा! MEMU ट्रेन मालगाड़ी से भिड़ी, आखिर चूक हुई कहां?

  • छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। मंगलवार की शाम MEMU लोकल ट्रेन और मालगाड़ी के बीच भीषण टक्कर हो गई, जिसके बाद घटनास्थल पर बड़ा दर्दनाक दृश्य सामने आया। ताजा जानकारी के अनुसार इस रेल दुर्घटना में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। फिलहाल रेलवे, सुरक्षा एजेंसियां और टेक्निकल टीमें घटना की विस्तृत जांच में जुटी हुई हैं, ताकि यह समझा जा सके कि आखिर यह हादसा किन कारणों से हुआ।
  • प्रारंभिक जांच में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिससे संकेत मिल रहा है कि दुर्घटना से पहले किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही या सिग्नलिंग एरर सामने आया हो सकता है। 4 नवंबर की शाम को कोरबा—बिलासपुर रूट पर चलने वाली MEMU (Mainline Electric Multiple Unit) यात्री ट्रेन, गतोरा रेलवे स्टेशन के नजदीक लाल खदान क्षेत्र में खड़ी एक मालगाड़ी से तेज रफ्तार में टकरा गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि यात्री ट्रेन मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गई और काफी डिब्बों को भारी क्षति पहुंची।
  • इस हादसे के बाद रेलवे संचालन, सुरक्षा सिस्टम, इंटरलॉकिंग और ट्रैक सिग्नलिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच रिपोर्ट और तकनीकी विश्लेषण से ही यह स्पष्ट होगा कि गलती मानव स्तर पर हुई, मशीनरी की विफलता थी या प्रोटोकॉल में कोई गंभीर कमी थी।
    इस बीच राहत, बचाव और पुनर्स्थापना का कार्य जारी है।

क्या था हादसे के पीछे असली कारण?

  • प्रारंभिक जांच में सामने आ रहा है कि इस बिलासपुर रेल हादसे में सबसे बड़ा कारण सिग्नलिंग की अनदेखी और ट्रेन के पायलट द्वारा चेतावनियों को इग्नोर करना बताया जा रहा है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार MEMU ट्रेन के लोको पायलट ने मालगाड़ी से टकराने से पहले कई जरूरी Warning Signals को नजरअंदाज किया था।
  • सूत्रों के मुताबिक जब MEMU ट्रेन गतोरा स्टेशन से रवाना हुई तो हरी झंडी मिलने के बाद वह करीब 76 Kmph की स्पीड पर दौड़ रही थी। इसके बाद रास्ते में उसने एक Double Yellow Signal और एक Single Yellow Signal पार किया, जबकि ये दोनों संकेत ट्रेन को स्पीड कम करने की चेतावनी दे रहे थे। इसके बावजूद ट्रेन की रफ्तार में कोई कमी नहीं की गई और MEMU ट्रेन लगातार हाई स्पीड में चलती रही।
  • जांचकर्ताओं के मुताबिक टक्कर से कुछ ही पल पहले ट्रेन को Red Signal भी दिया गया था, जोकि स्पष्ट रूप से रुकने का निर्देश होता है। लेकिन ट्रेन फिर भी नहीं रुकी और सीधे खड़ी मालगाड़ी में जा भिड़ी। बताया जा रहा है कि टक्कर के समय MEMU ट्रेन की गति लगभग 50 Kmph थी।
  • इस पूरे मामले ने रेलवे सुरक्षा प्रणाली, सिग्नलिंग सिस्टम और पायलट की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि गलती मानवीय थी, तकनीकी थी या दोनों स्तर पर चूक हुई।

औपचारिक जांच शुरू

  • बिलासपुर रेल हादसे के बाद अब इस पूरे मामले की Formal Investigation आधिकारिक रूप से शुरू कर दी गई है। रेलवे ने इस दुर्घटना को लेकर बेहद गंभीर रुख अपनाया है। Railway Safety Commissioner (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा की अगुवाई में पाँच सदस्यीय जांच टीम ने बिलासपुर डीआरएम कार्यालय में अपनी पूछताछ और साक्ष्य संग्रह प्रक्रिया शुरू कर दी है। टीम ने घटना से जुड़े 19 रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से बयान लिए हैं और तकनीकी इनपुट भी जुटाए जा रहे हैं। यह पूरी औपचारिक जांच दो दिनों तक जारी रहेगी, वहीं तीन दिनों के अंदर विस्तृत जांच रिपोर्ट Railway Board को भेज दी जाएगी।

किन-किन से हुई पूछताछ?

  • जांच टीम ने कई ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है, जिनके पास घटना से जुड़े प्राथमिक तकनीकी इनपुट और ट्रेन संचालन से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं।
  • पूछताछ किए गए लोगों में सहायक लोको पायलट रश्मि राज, मालगाड़ी गार्ड सुनील कुमार साहू, सहायक लोको पायलट पुनीत कुमार, MEMU प्रबंधक ए.के. दीक्षित, मालगाड़ी प्रबंधक शैलेश चंद्र समेत ट्रेन Operations और Signalling सिस्टम से जुड़े कई अधिकारी शामिल हैं। सभी को दोनों ट्रेनों की मूवमेंट, सिग्नल रिकॉर्ड, रजिस्टर और संबंधित Log Files प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
  • ये बयान और डॉक्यूमेंटेशन ही आगे इस बात को साफ करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि इस भीषण टक्कर में गलती Human Error थी, Signalling Failure था या दोनों स्तर पर गंभीर चूक हुई।

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