Uttarakhand

ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को जमानत, खटीमा वारंट ने रोकी रिहाई

  • ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को मंगलवार को हल्द्वानी के मुखानी थाने में दर्ज मामलों में जमानत मिल गई, लेकिन इसके बावजूद वह जेल से रिहा नहीं हो सकीं। कारण यह रहा कि खटीमा (ऊधम सिंह नगर) में दर्ज एक अन्य मामले में पुलिस ने बी-वारंट जेल प्रशासन को सौंप दिया, जिसके चलते उनकी रिहाई पर रोक लग गई।
  • जेल प्रशासन के अनुसार, ज्योति अधिकारी को अब बुधवार को संबंधित दूसरी अदालत में पेश किया जाएगा।
    जेल अधीक्षक प्रमोद पांडे ने बताया कि बी-वारंट प्रभावी होने के कारण नियमों के तहत रिहाई संभव नहीं हो सकी।

कैसे शुरू हुआ मामला

  • ज्योति अधिकारी के खिलाफ पहला मामला मुखानी थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। एक युवती जूही चुफाल की शिकायत पर आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, पहाड़ की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और सार्वजनिक स्थान पर दराती लहराने जैसी बातें सामने आईं। इसके आधार पर पुलिस ने धार्मिक भावना आहत करने, आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
  • इसके बाद 8 जनवरी को ज्योति अधिकारी को गिरफ्तार कर उपकारागार हीरानगर भेज दिया गया। बाद में मुखानी थाने में ही वादी को धमकाने का एक और मामला दर्ज किया गया। इसी बीच वीडियो के आधार पर खटीमा, रुद्रपुर और अल्मोड़ा में भी उनके खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हुईं।

कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं

  • मुखानी थाने से जुड़े मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट विशाल ठाकुर की अदालत ने सुनवाई के बाद जमानत मंजूर की। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र बिष्ट और गौरव कपूर ने दलील दी कि वीडियो का उद्देश्य धार्मिक भावनाएं भड़काना नहीं था। शिकायत में वीडियो की तारीख और स्थान का स्पष्ट उल्लेख भी नहीं है।
  • बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दराती रखने का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था और यदि समाज में गलत संदेश गया है तो ज्योति अधिकारी वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक माफी मांगने को भी तैयार हैं
  • यह पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया, कानून के तहत जमानत का अधिकार और सोशल मीडिया अभिव्यक्ति की सीमाओं से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिस पर अब आगे की सुनवाई संबंधित अदालतों में होगी।

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