दर्द से मानवता तक: 9 दिन के नवजात के देहदान से माता-पिता का महान फैसला
- नवजात की किलकारी से शुरू हुई खुशी नौ दिन में गहरे शोक में बदल गई, लेकिन चमोली निवासी दंपती ने दुख की घड़ी में भी मानवता और साहस का परिचय दिया। AIIMS ऋषिकेश में उपचार के दौरान मृत हुए 9 दिन के नवजात का देहदान कर माता-पिता ने चिकित्सा शोध और मानव कल्याण के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
- नवजात में जन्मजात महावृहदान्त्र रोग (हिर्शस्प्रुंग डिजीज) पाया गया था, जिसके इलाज के लिए उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। सफल ऑपरेशन के बावजूद रिफ्रैक्टरी सेप्टिक शॉक के कारण शिशु का निधन हो गया।
- शोकाकुल दंपती को देहदान के महत्व की जानकारी दी गई, जिसके बाद उन्होंने मानव कल्याण के उद्देश्य से देहदान की सहमति दी। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नवजात की देह एनाटॉमी विभाग को सौंपी गई, ताकि भविष्य में चिकित्सा शोध और प्रशिक्षण में इसका उपयोग हो सके।
- यह निर्णय जीवन के सम्मान, मानवता और स्वास्थ्य के अधिकार की भावना को मजबूत करता है—जहां एक मासूम की विदाई भी अनेक जिंदगियों के लिए आशा बन गई।
