Uttarakhand

हरीश रावत के इस्तीफे से उत्तराखंड कांग्रेस में हलचल, गोदियाल का बड़ा बयान- ‘कार्रवाई 10 साल पहले हो चुकी’

  • पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। ईडी ने जीना के ठिकाने पर कार्रवाई के दौरान करीब 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त और फ्रीज किए जाने की जानकारी दी है। यह मामला 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
  • ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की घोषणा की। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनसे जुड़े किसी विवाद का असर पार्टी की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर पड़े।
  • हरीश रावत ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व, खासतौर पर राहुल गांधी, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रहा है। ऐसे समय में यदि किसी पार्टी नेता या उससे जुड़े व्यक्ति को लेकर विवाद खड़ा होता है, तो इससे कांग्रेस की मुहिम कमजोर हो सकती है। इसी नैतिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने संगठनात्मक पद छोड़ने का फैसला लिया।
  • रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने पूर्व OSD से जुड़े आरोपों को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में OMR शीट से किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है और इसमें उनके सहयोगी की भूमिका साबित होती है, तो वह इस पर शर्मिंदगी महसूस करेंगे। हालांकि, उन्होंने आरोपों पर विश्वास नहीं होने की बात भी कही है। मामले की ईडी जांच अभी जारी है।
  • इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हरीश रावत का बचाव करते हुए कहा कि रावत को ऐसे मामले में घेरा जा रहा है, जिस पर उनके कार्यकाल के दौरान ही करीब 10 साल पहले कार्रवाई की जा चुकी थी। उनके बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस के भीतर और राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
  • हरीश रावत के इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी और पार्टी की छवि बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और संगठन के भीतर नई बहस छेड़ दी है।

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