CM हेल्पलाइन की फाइलें दबाने वाले अफसरों पर कसने लगा शिकंजा, 6 महीने पुरानी शिकायतों पर देहरादून DM सख्त
- जनसमस्याओं के निस्तारण में हीलाहवाली करने और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों पर महीनों तक कुंडली मारकर बैठे रहने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है। जिले में 36 दिन से लेकर 180 दिन (6 महीने) तक लंबित पड़ी शिकायतों ने जब जिला प्रशासन की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, तो जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लापरवाह अफसरों पर सीधे कार्रवाई और जवाबदेही तय करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
- कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सीएम हेल्पलाइन और मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विभागवार पेंडिंग फाइलों की पड़ताल की। महीनों से अटके मामलों पर गहरी नाराजगी जताते हुए डीएम ने साफ किया कि पोर्टल पर शिकायत को महज़ ‘बंद‘ (Close) कर देना समस्या का समाधान नहीं माना जाएगा।
बिना प्रमाण पत्र बंद नहीं होगी शिकायत
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डीएम ने नया नियम लागू करते हुए निर्देश दिए हैं कि किसी भी शिकायत को ‘फोर्स क्लोज’ (Force Close) करने से पहले संबंधित विभागाध्यक्ष को एक आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस प्रमाण पत्र में स्पष्ट तौर पर दर्ज करना होगा कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तव में क्या निस्तारण किया गया है और उससे शिकायतकर्ता संतुष्ट है या नहीं।
दो दिन के भीतर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
- जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने 36 से 180 दिनों से अटकी सभी शिकायतों की विभागवार सूची तैयार कर दो दिनों के भीतर विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच के दौरान बिना किसी ठोस कारण के शिकायत लंबित पाई गई या कागजी खानापूर्ति कर मामला दबाने की कोशिश की गई, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक गाज गिरना तय है।
डेढ़ साल पुरानी घोषणाओं पर भी अब हिसाब-किताब
- सीएम हेल्पलाइन के अलावा बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणाओं की प्रगति पर भी चाबुक चला। वर्ष 2025 से अधर में लटकी मुख्यमंत्री घोषणाओं में संतोषजनक काम न दिखने पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी करने के निर्देश दिए हैं।
