कूड़े का पहाड़ बना उत्तराखंड: 13 लाख टन कचरा, समाधान के लिए लखनऊ मॉडल आखिरी विकल्प
- उत्तराखंड में पुराने कचरे (लीगेसी वेस्ट) की समस्या गंभीर होती जा रही है। राज्य की 50 से अधिक डंपिंग साइट्स पर करीब 12.82 लाख मीट्रिक टन कचरा अब भी खुले में पड़ा है, जो पर्यावरण, भूजल और जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। अब तक केवल 27 प्रतिशत कचरे का ही निस्तारण हो सका है।
- इसके उलट लखनऊ में 6.5 लाख मीट्रिक टन कचरे के पहाड़ को पूरी तरह हटाकर डंपिंग साइट को प्रेरणा स्थल में बदला जा चुका है। इस लखनऊ मॉडल को अब उत्तराखंड में अपनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
देहरादून–हरिद्वार सबसे ज्यादा प्रभावित
- राज्य में देहरादून और हरिद्वार में सबसे अधिक लीगेसी वेस्ट जमा है। वहीं अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में कचरा निस्तारण की प्रक्रिया शुरुआती स्तर पर ही अटकी हुई है।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत फंड मिलने के बावजूद कई परियोजनाएं धीमी गति से चल रही हैं।
लखनऊ की सफलता बनी मिसाल
- लखनऊ में यह उपलब्धि उत्तराखंड की बेटी और मेयर सुषमा खर्कवाल के नेतृत्व से संभव हो सकी, जिन्होंने छह महीने में कचरे के पहाड़ का पूर्ण निस्तारण कर दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही मॉडल अपनाया जाए, तो उत्तराखंड के शहरों को भी कचरा मुक्त और स्वच्छ बनाया जा सकता है।
- यह मुद्दा सीधे तौर पर स्वच्छ पर्यावरण में जीने के अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा और शहरी जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा है, जिस पर अब त्वरित और ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
