देहरादून जू में पहली बार आएगा White Tiger, एडवेंचर लवर्स के लिए खुशखबरी!
देहरादून जू (मालसी डियर पार्क) में जल्द ही सफेद बाघ (White Tiger) को लाने की तैयारी शुरू हो गई है। जू बोर्ड की हाल ही में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया कि अगले दो महीनों के भीतर इस दुर्लभ प्रजाति के बाघ को लाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इस खबर ने न केवल जू प्रेमियों, बल्कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में भी उत्साह भर दिया है।
बैठक की अध्यक्षता प्रमुख वन सचिव आर.के. सुधांशु ने की, जिसमें सफेद बाघ की सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास और देखभाल से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि बाघ के आने से पहले उसके लिए सुरक्षित और उपयुक्त वातावरण तैयार किया जाए।
जू की सुविधाएं होंगी और आधुनिक
बैठक में यह भी तय किया गया कि देहरादून जू को और आधुनिक व सुविधाजनक बनाया जाएगा, ताकि यहां आने वाले सैलानियों को बेहतर अनुभव मिल सके।
इसके लिए कई विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनमें शामिल हैं:
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मल्टीलेवल पार्किंग की व्यवस्था
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नए शौचालयों का निर्माण
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QR कोड आधारित टिकटिंग और भुगतान प्रणाली
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आगंतुक फीडबैक सिस्टम
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ऑटोमेटेड पार्किंग मैनेजमेंट
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स्मारिका (Souvenir) दुकान की स्थापना
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परिसर का सौंदर्यीकरण और संरचनात्मक सुधार
इन सभी पहलों का उद्देश्य जू को पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण दोनों दृष्टियों से नई पहचान दिलाना है।
बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
बैठक में मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो, वन संरक्षक राजीव धीमान, निदेशक नीरज शर्मा, डॉ. प्रशांत मिश्रा, और जू इंचार्ज विनोद लिंगवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून जू में सफेद बाघ लाने की तैयारी तेज़, चुनौती भी कम नहीं
- देहरादून जू (मालसी डियर पार्क) में जल्द ही सफेद बाघ (White Tiger) को लाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। हालांकि यह पहल जितनी रोमांचक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकती है।
उत्तराखंड सरकार ने इसके लिए ओडिशा के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से एक सफेद बाघ प्राप्त करने की योजना बनाई है। इस समझौते के तहत चार तेंदुआ प्राणियों का आदान-प्रदान प्रस्तावित है। - यह प्रस्ताव फिलहाल केंद्रीय जू प्राधिकरण (Central Zoo Authority) की स्वीकृति के इंतजार में है। जैसे ही मंजूरी मिलती है, बाघ को देहरादून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- सफेद बाघ के आने से न केवल देहरादून जू की शोभा और लोकप्रियता बढ़ेगी, बल्कि सैलानियों को भी एक अनूठा वन्यजीव अनुभव मिलेगा।
हालांकि, इसके लिए प्रशासन को कई बातों का ध्यान रखना होगा — जैसे उपयुक्त झुंड आकार, स्वास्थ्य और आहार प्रबंधन, पर्यावरण-अनुकूल आवास और विशेष देखभाल व्यवस्था, ताकि बाघ का स्वास्थ्य और व्यवहार सामान्य बना रहे।
इसलिए खास है देहरादून जू, सफेद बाघ से बढ़ेगी पहचान
- देहरादून जू, जिसे पहले मालसी डियर पार्क के नाम से जाना जाता था, की स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी।
लगभग 25 हेक्टेयर में फैला यह पार्क उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में से एक है।
यहां आगंतुकों को हिरण, नीलगाय, सांभर, मगरमच्छ, विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ और सांपों को देखने का अवसर मिलता है। - जू का एक्वेरियम सेक्शन भी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है, जिसमें दुर्लभ और आकर्षक मछलियों की कई प्रजातियाँ प्रदर्शित की गई हैं।
सफेद बाघ के आने से यह जू न केवल देहरादून का बल्कि पूरा उत्तराखंड का वन्यजीव केंद्रबिंदु बन सकता है।
