Happy Birthday Amitabh Bachchan: 83 की उम्र में भी सुपरस्टार, जिन्होंने निभाए 200 से ज़्यादा यादगार किरदार
- भारत में जहां ज़्यादातर लोग 60 की उम्र के बाद काम से विराम ले लेते हैं, वहीं 83 की उम्र में अमिताभ बच्चन अब भी अपनी मेहनत और जोश से युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। आम हिंदुस्तानी घरों में इस उम्र के बुजुर्ग अक्सर कहते हैं — “अब हमें क्या करना, जो करना था कर लिया, अब तुम लोग संभालो…” लेकिन अमिताभ इस सोच को बिल्कुल उलटते नज़र आते हैं।
- एक दर्जन से ज़्यादा गंभीर सर्जरी के बावजूद, वे आज भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के मंच पर उत्साह से भरपूर कदम रखते हैं — जैसे उम्र ने उनके लिए सिर्फ एक संख्या भर रह गई हो।
- हिंदी सिनेमा में वरिष्ठ अभिनेताओं की परंपरा नई नहीं है — अशोक कुमार, नाज़िर हुसैन, ओम प्रकाश, अभि भट्टाचार्य, श्रीराम लागू, और ए.के. हंगल जैसे कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति से पर्दे को समृद्ध किया। मगर अमिताभ बच्चन की सक्रियता और किरदारों की विविधता उन्हें इन सबसे अलग बनाती है।
- जहां पुराने कलाकारों के किरदार प्रायः उम्र की सीमाओं और लाचारी को दर्शाते थे, वहीं अमिताभ ने अपनी फिल्मों से साबित किया कि उम्र थकावट नहीं, ताकत होती है।
‘झुंड’, ‘गुलाबो सिताबो’, ‘कल्कि 2898 AD’, ‘पीकू’, ‘पिंक’, ‘सत्याग्रह’, ‘बागबान’, ‘वक्त’, ‘फैमिली’, ‘सरकार’, ‘ब्लैक’, ‘नि:शब्द’, और ‘कभी अलविदा न कहना’ जैसी फिल्मों में उन्होंने दिखाया कि अनुभव इंसान को कमजोर नहीं करता — बल्कि हर किरदार के साथ और मज़बूत बना देता है।
2000 के बाद शुरू हुई अमिताभ बच्चन की असली पारी: उम्र के साथ और निखरा महानायक का करियर
- अमिताभ बच्चन, जिन्हें पूरी दुनिया बिग बी के नाम से जानती है, ने साबित किया कि असली करियर उम्र के साथ खत्म नहीं होता — बल्कि नए आयामों के साथ शुरू होता है।
वर्ष 2000 के बाद उनके जीवन और अभिनय ने एक नई चमक हासिल की। - जब आने वाले समय में अमिताभ के समग्र योगदान का मूल्यांकन होगा, तो यह तय करना मुश्किल होगा कि उन्हें ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में याद किया जाए या ‘जीवंत प्रौढ़ कलाकार’ के रूप में। लेकिन एक बात निश्चित है — अमिताभ सिर्फ सिनेमा के नहीं, बल्कि उस सोच के प्रतीक बन गए जिसने भारत में सक्रियता की उम्र ही बदल दी।
- 60 की उम्र के बाद जहां आम लोग रिटायरमेंट की बात सोचते हैं, वहीं अमिताभ ने अपने अभिनय करियर का सबसे सशक्त और प्रेरणादायक दौर शुरू किया।
‘मोहब्बतें’, ‘अक्स’, ‘बागबान’, ‘देव’, ‘ब्लैक’, ‘सरकार’, ‘नि:शब्द’, ‘चीनी कम’, ‘द लास्ट लीयर’, ‘पीकू’, और ‘पिंक’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई दिशा दी। - अगर ये फिल्में उनकी फिल्मोग्राफी का हिस्सा न होतीं, तो शायद अमिताभ बच्चन भी उन सितारों में गिने जाते जिन्हें वक्त के साथ भुला दिया जाता।
लेकिन बिग बी ने हर फिल्म में खुद को पहले से बेहतर, और ज्यादा परिपक्व रूप में प्रस्तुत किया — यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। - उन्होंने यह साबित किया कि असली महानायक वही है, जो हर दौर में खुद को पुनः खोज सके और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन सके।
इन फिल्मों से मिले राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान
- ‘पीकू’ में उनकी बातूनी शैली जितनी जीवंत है, ‘पिंक’ में उनका मौन उतना ही प्रभावशाली।
2005 में ‘ब्लैक’ के लिए और 2009 में ‘पा’ के लिए अमिताभ बच्चन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
यही नहीं, 2016 में ‘पीकू’ में पिता के किरदार के लिए उन्हें फिर से राष्ट्रीय पुरस्कार मिला — यह साबित करते हुए कि उनका हर दौर अभिनय का नया मानक गढ़ता है। - अमिताभ की सबसे खास बात यह है कि जब दर्शकों को लगता है कि उनकी यात्रा अब पूरी हो चुकी है, तभी वे एक नई पारी के लिए तैयार नज़र आते हैं।
83 की उम्र में भी जनता से जुड़ा महानायक
1982 से शुरू हुई उनकी परंपरा — हर रविवार अपने घर ‘जलसा’ के बाहर प्रशंसकों से मिलने की — आज भी जारी है।
हर हफ्ते हजारों लोग उनके दर्शन के लिए उमड़ते हैं, और वे अब भी उसी सादगी से सबका अभिवादन करते हैं।
सच ही कहा गया है, ईश्वर को भी पता है अमिताभ की अहमियत, क्योंकि जो इंसान 83 की उम्र में भी इतने दिलों में जिंदा हो, वह सिर्फ अभिनेता नहीं, एक भावना है।
