छात्रसंघ चुनाव: सीएम धामी के क्षेत्र में एबीवीपी का दबदबा, लहराया भगवा परचम
- अपनी राजनीतिक कर्मभूमि खटीमा को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इसका सीधा सियासी लाभ मिलता नजर आ रहा है। खटीमा में छोटे से लेकर बड़े चुनावों तक भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठनों का विजय रथ लगातार आगे बढ़ रहा है। नगर निकाय, सहकारिता और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में मिली शानदार सफलता के बाद अब छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जीत ने सीएम के मजबूत जनाधार पर एक बार फिर मुहर लगा दी है।
विकास और जनजुड़ाव की राजनीति का असर
- प्रदेश की कमान संभालने के बाद भी मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा से अपना जमीनी जुड़ाव कमजोर नहीं होने दिया। क्षेत्र में ऑक्सीजन पार्क, अत्याधुनिक गौशाला, प्रस्तावित स्टेडियम, एकलव्य विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और सड़कों के बुनियादी ढांचे जैसी तमाम घोषणाएं न सिर्फ स्वीकृत हुईं, बल्कि धरातल पर भी उतरीं। भाजपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि विकास की इसी राजनीति का प्रतिफल लगातार मिल रही चुनावी सफलताओं के रूप में सामने आ रहा है।
शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक एकतरफा पकड़
खटीमा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा हर स्तर पर देखने को मिला है:
-
निकाय चुनाव: नगर पालिका अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी रमेश चंद्र जोशी ने बड़ी जीत दर्ज कर विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया था।
-
सहकारिता चुनाव: सहकारिता चुनावों में भी विपक्ष दूर-दूर तक मुकाबले में नहीं दिखा और भाजपा की ममता मेहरोत्रा निर्विरोध निर्वाचित हुईं।
-
पंचायत चुनाव: त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में खटीमा की 6 में से 5 जिला पंचायत सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अजय मौर्य और ब्लॉक प्रमुख पद पर सरिता राना (निर्विरोध) की जीत ने साबित किया कि पार्टी का आधार ग्रामीण इलाकों में भी बेहद मजबूत है।
छात्रसंघ चुनाव में भी अभाविप का परचम
- स्थानीय राजनीति के साथ-साथ अब छात्र राजनीति में भी भगवा खेमे का उत्साह चरम पर है। हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय महाविद्यालय, खटीमा में अभाविप के अध्यक्ष पद प्रत्याशी धीरज कन्याल ने शानदार जीत दर्ज की है। निकाय, गांव की सरकार और सहकारिता के बाद छात्र राजनीति में मिले इन नतीजों को भाजपा की भावी राजनीतिक जमीन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
- कुल मिलाकर, लगातार आ रहे ये परिणाम यही संदेश दे रहे हैं कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व और विकास कार्यों के बल पर उनकी कर्मभूमि खटीमा में भाजपा का किला लगातार मजबूत बना हुआ है।
