Uttarakhand

उत्तराखंड विधानसभा में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: UCC पर स्टैंड और आंदोलनकारियों को नमन

  • उत्तराखंड दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राज्य विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया। वह सुबह करीब 11 बजे विधानसभा परिसर पहुंचीं। विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रपति का स्वागत किया, वहीं मंच पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति का यह संबोधन प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
  • राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पिछले 25 सालों में देवभूमि ने विकास के कई नए आयाम हासिल किए हैं। पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सेक्टर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्तराखंड ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यहां की जनता मेहनती है और यही मेहनत राज्य को लगातार आगे ले जा रही है तथा भविष्य में भी विकास की गति को और मजबूत करेगी।

उत्तराखंड गठन से लेकर महिला सशक्तिकरण तक: राष्ट्रपति मुर्मू के भाषण की मुख्य बातें

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वर्ष 2000 में जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उत्तराखंड राज्य का निर्माण किया गया था। तब से अब तक प्रदेश ने संतुलित, समावेशी और स्थायी विकास मॉडल की दिशा में निरंतर उत्कृष्ट काम किया है। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड ने डिजिटल और फिजिकल दोनों कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय तेजी से प्रगति दर्ज की है।
  • महिला सशक्तिकरण पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं हमेशा से प्रेरणा स्त्रोत रही हैं और उन्होंने राज्य के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी कई महिलाओं ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष के रूप में ऋतु खंडूरी भूषण की नियुक्ति ने भी प्रदेश के सम्मान और गौरव में वृद्धि की है।
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक को लागू करने का फैसला उत्तराखंड विधानसभा का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। इससे संविधान के अनुच्छेद 44 में सम्मिलित UCC की भावना को और मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय को केंद्र में रखते हुए बनाए गए विधेयकों को पारित करने के लिए वर्तमान व पूर्व विधायकों की सराहना की जानी चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती अध्यात्म व वीरता से भरी है। कुमाऊं और गढ़वाल रेजीमेंट तो अपने नाम भर से भारत की सैन्य शौर्य-परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। राष्ट्रपति ने कहा कि सैन्य सेवा का जज्बा यहां के युवाओं में हमेशा की तरह आज भी उतना ही मजबूत है।
  • राष्ट्रपति मुर्मू ने विधायकों से आग्रह किया कि विकास और जनकल्याण के कार्यों को ईमानदारी, संवेदनशीलता व निष्ठा से आगे बढ़ाते रहें। समाज के पिछड़े, वंचित और युवा वर्ग की उन्नति के लिए गंभीरता से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायकों का आम जनता और शासन के बीच महत्वपूर्ण पुल की भूमिका होती है, और यदि यह जुड़ाव सेवा भाव से होगा तो जनता और प्रतिनिधि के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत होगा।
  • उन्होंने कहा कि विधानसभाएँ लोकतंत्र की आधारशिला हैं। राष्ट्रपति ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी निरंतर उत्तरदायित्व है। साथ ही उन्होंने बताया कि नेशनल इलेक्ट्रॉनिक विधान एप्लिकेशन (NeVA) के माध्यम से उत्तराखंड विधानसभा ने डिजिटल विधायी कार्यों की दिशा में सराहनीय कदम बढ़ाया है।
  • राष्ट्रपति ने अंत में कहा कि राज्य की अद्वितीय प्राकृतिक धरोहर और सौंदर्य का संरक्षण करते हुए विकास का रास्ता चुना जाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ उत्तराखंड आने वाले वर्षों में एक स्वर्णिम विकास युग की ओर बढ़ेगा।
  • विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह क्षण उत्तराखंड के लिए गर्व का है। राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष, संकल्प और समाज सेवा से बना है। वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी राष्ट्रपति के संबोधन को अपने लिए सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है, प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला करने के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने जल, जंगल, जमीन संरक्षण, पलायन रोकने, स्वास्थ्य व शिक्षा के विस्तार तथा रोजगार को मजबूत करने पर भी जोर दिया।

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