Uttarakhand

ऋषिकेश में वन सर्वे को लेकर जनाक्रोश, 65 घंटे पहले मिले संकेतों के बावजूद प्रशासन रहा बेखबर

  • करीब 65 घंटे पहले शुरू हुआ वन सर्वे इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन बन जाएगा, इसका पुलिस-प्रशासन को पूर्वानुमान नहीं हो सका। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे वन विभाग, राजस्व और पुलिस की टीमें सर्वे क्षेत्र में पहुंचीं। पहले दिन विरोध सीमित रहा, लेकिन दूसरे दिन हाईवे घंटों जाम रहा और तीसरे दिन हालात और बिगड़ गए।
  • तीसरे दिन सर्वे टीम के पहुंचते ही सड़क से लेकर रेलवे ट्रैक तक बाधित हो गया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि शांत मानी जाने वाली तीर्थ नगरी ऋषिकेश में तीन जिलों की पुलिस को फ्लैग मार्च निकालना पड़ा।
  • ऋषिकेश नगर निगम का बाहरी इलाका वन भूमि पर बसा हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर अदालत ने वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सख्त टिप्पणी की और उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार 5 जनवरी तक रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जानी है।
  • सर्वे शुरू होते ही लोगों में यह आशंका गहराने लगी कि उनके घर उजाड़ दिए जाएंगे। इसी डर के चलते लोग गलियों में बल्लियां लगाकर विरोध में उतर आए। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस कार्रवाई से करीब एक लाख की आबादी प्रभावित हो सकती है।
  • इंटरनेट मीडिया पर अधूरी और भ्रमित करने वाली जानकारी फैलती रही, जिससे लोगों का आक्रोश अंदर ही अंदर सुलगता रहा। शनिवार को हाईवे जाम होने के बावजूद प्रशासन स्थिति की गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ पाया।
  • रविवार को अवकाश के कारण लोगों को लगा कि सर्वे नहीं होगा, लेकिन जैसे ही टीमें दोबारा पहुंचीं, विरोध उग्र हो गया। शाम तक स्थिति पथराव और लाठीचार्ज तक पहुंच गई। हालात संभालने के लिए देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और पौड़ी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।

इन क्षेत्रों में चल रहा है वन सर्वे

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग की टीमें मीरानगर, शिवाजी नगर, बैराज मार्ग, बीस बीघा, बापू ग्राम, सुमन विहार, अमित ग्राम (पूरब-पश्चिम) और मालवीय नगर सहित कई वार्डों में खाली पड़ी वन भूमि की नपाई कर रही हैं। नपाई के बाद विभागीय बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिन्हें कुछ स्थानों पर लोगों द्वारा हटाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
  • यह पूरा मामला आवास के अधिकार, सूचना की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़ा हुआ है, जिस पर प्रशासन को संवेदनशील और संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

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