भू-कानून के बाद बड़ा खेल: उत्तराखंड में ट्रस्ट ने बेची जमीन, 165 प्लॉट खरीदारों की बढ़ी चिंता
- Dehradun में कड़े भू-कानून लागू होने के बाद जमीन विवाद सामने आया है। भारतीय सैन्य अकादमी के पीछे स्थित कृषि भूमि पर कॉलोनी काटकर 165 लोगों को आवासीय प्लॉट बेच दिए गए, जिससे अब खरीदारों की चिंता बढ़ गई है।
- जानकारी के अनुसार, यह जमीन पहले मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान के निर्माण के उद्देश्य से सस्ती दरों पर खरीदी गई थी। बाद में इस पर कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेच दिए गए। अब सरकार की ओर से भूमि को राज्य में निहित किए जाने की संभावना के चलते प्लॉट खरीदार परेशान हैं।
- खरीदारों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अवसर देने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी से छोटे-छोटे भूखंड खरीदे हैं। भूमि खरीदने से पहले स्थानीय राजस्व अधिकारियों से सभी दस्तावेजों की जांच कराई गई थी, जिसमें जमीन को कृषि श्रेणी की और विवाद रहित बताया गया था।
- खरीदारों के मुताबिक, इस जमीन पर करीब 165 प्लॉट बेचे गए हैं, जिनमें कई पूर्व सैनिक भी शामिल हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि कोई जांच या कार्रवाई प्रस्तावित हो, तो पहले सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
- इधर, डेमोग्राफी और भूमि मामलों को लेकर सरकार की सख्ती पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Mahendra Bhatt ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन को, वर्ष 2022 में Pushkar Singh Dhami सरकार के कड़े भू-कानून लागू होने के बाद तेजी से बेचा गया।
- भट्ट ने कहा कि धर्मांतरण और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई से घबराकर ट्रस्ट ने पिछले दो वर्षों में अपनी पूरी जमीन बेच दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की कार्रवाई से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
- उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है और अपराध, अवैध गतिविधियों व साजिशों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, डाकपत्थर में प्रस्तावित एजुकेशन सिटी परियोजना को लेकर कांग्रेस के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
- भट्ट ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य की संस्कृति, जनसंख्या संतुलन और नागरिकों के हितों की रक्षा करना है और इस दिशा में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
- फिलहाल, 165 प्लॉट खरीदार प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की उम्मीद लगाए हुए हैं और मामले के निष्पक्ष समाधान की मांग कर रहे हैं।
