Uttarakhand

महिला सफाईकर्मी से मारपीट का आरोप: पार्षद पर हाथ तोड़ने का केस, शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित

  • देहरादून में पंडितवाड़ी वार्ड-38 के पार्षद अभिषेक तिवारी पर एक महिला सफाईकर्मी से मारपीट और उसका हाथ तोड़ने के आरोप के बाद नगर निगम में तनाव की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही निगम परिसर में सफाई कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
  • पीड़ित सफाईकर्मी माया ने आरोप लगाया कि नाली सफाई को लेकर पूछताछ के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार और कथित जातिसूचक टिप्पणी की गई। विरोध करने पर धक्का-मुक्की और मारपीट हुई, जिससे उनका हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया। फिलहाल वह मेडिकल जांच के लिए अस्पताल गई हैं और रिपोर्ट का इंतजार है।
  • घटना के बाद सफाई कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल एक महिला कर्मी का मामला नहीं, बल्कि पूरे सफाईकर्मी समुदाय के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
  • कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पार्षद ने धमकी दी कि “जैसे मैं कहूंगा, वैसे ही काम होगा।” इस कथित बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि जब तक आरोपी सार्वजनिक माफी नहीं मांगते और उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
  • नगर निगम प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। हालांकि, कर्मचारियों के आंदोलन की चेतावनी से प्रशासन दबाव में है।

होली से पहले सफाई व्यवस्था पर संकट

  • देहरादून नगर निगम के अनुसार, शहर में रोजाना लगभग 600 मीट्रिक टन कूड़ा उठाया जाता है। यदि सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो 24 घंटे के भीतर ही शहर की सड़कों और बाजारों में कूड़े के ढेर लगने की आशंका है।
  • होली से पहले बढ़ती भीड़ और खरीदारी के बीच यदि डोर-टू-डोर कलेक्शन और नाली सफाई रुकती है, तो स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इससे आम नागरिकों, दुकानदारों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यह मामला केवल एक विवाद नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और श्रमिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारियों के अगले कदम पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *