उत्तराखंड में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का आरोप, लोगों ने कर्मियों को लौटाया घर
- उत्तराखंड में ऊर्जा निगम की ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को राजेंद्र नगर वार्ड में मीटर लगाने पहुंची अनुबंधित कंपनी की टीम को स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा।
- लोगों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम जबरन मीटर बदलवा रहा है, जबकि पुराने मीटर बिल्कुल सही काम कर रहे हैं। उपभोक्ताओं ने साफ चेतावनी दी कि अगर जबरदस्ती नए मीटर लगाए गए, तो वे आंदोलन शुरू करेंगे।
- विरोध बढ़ता देख कंपनी के कर्मचारियों को बिना मीटर लगाए ही लौटना पड़ा।
वार्ड की पार्षद प्रीति आर्या ने कहा कि पुराने मीटरों में कोई तकनीकी खराबी नहीं है, फिर भी उन्हें हटाया जा रहा है। यह कदम न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि बिजली व्यवस्था को निजीकरण की दिशा में धकेलने जैसा है।
उपभोक्ताओं ने की शिकायत, अधिक बिल और तकनीकी खामियों से बढ़ी नाराजगी
- उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते दिनों ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें उपभोक्ताओं ने नए मीटरों में तकनीकी खामियों और अधिक बिजली बिल आने की शिकायत की है।
- लोगों का कहना है कि “सुविधा” के नाम पर लगाए जा रहे ये मीटर अगर परेशानी पैदा कर रहे हैं, तो इनका कोई वास्तविक लाभ नहीं है। स्थानीय निवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि क्षेत्र में अब स्मार्ट मीटर नहीं लगने दिए जाएंगे, और यदि टीम दोबारा मीटर लगाने आई तो विरोध किया जाएगा।
- सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत साहू ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर अब लोगों के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। यदि वास्तव में इन मीटरों के फायदे हैं, तो ऊर्जा निगम को पारदर्शी तरीके से जानकारी साझा करनी चाहिए, अन्यथा मीटर बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
