Uttarakhand

ABVP सम्मेलन में CM धामी का संबोधन—कहा, संगठन के विचार देश को विकास की दिशा देते हैं

  • देहरादून: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिषद की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अधिवेशन से निकलने वाले विचार और संकल्प, देश के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सम्मेलन नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण के लिए समर्पित युवाओं का एक महासंगम है।

युवा शक्ति है राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी—CM धामी

  • मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है।
    उन्होंने कहा—
    “युवा अपने परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प के दम पर सक्षम, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकते हैं।”
  • मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के समाजसेवी श्रीकृष्ण पांडेय को यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2025 से सम्मानित भी किया।

अभाविप ने तैयार की संस्कारित और जागरूक छात्रशक्ति

  • सीएम धामी ने अभाविप से अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि संस्कार, संस्कृति और सेवाभाव का भाव उनके भीतर परिषद की पाठशाला ने ही विकसित किया।
  • उन्होंने कहा कि अभाविप ने राष्ट्रवादी, जागरूक, संस्कारित छात्रशक्ति तैयार कर सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैचारिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सरकार की युवा-केंद्रित योजनाओं का उल्लेख

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को राष्ट्रशक्ति मानते हुए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं—
  • स्टार्टअप इंडिया
  • स्किल इंडिया
  • डिजिटल इंडिया
  • मेक इन इंडिया
  • फिट इंडिया
  • नई शिक्षा नीति (NEP)
  • उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने युवाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे मौजूद

  • अधिवेशन में अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने परिषद के आगामी कार्यक्रमों और नीतियों पर प्रकाश डाला।

अधिवेशन में पारित हुए पांच प्रमुख प्रस्ताव

  • अभाविप के अधिवेशन में निम्नलिखित पांच महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए—
  1. सभी शैक्षणिक संस्थानों को पर्याप्त वित्तीय आवंटन के साथ एक संरचना के अंतर्गत लाया जाए।
  2. बांग्लादेशी घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती माना जाए।
  3. मानवीय क्रियाकलापों से उत्पन्न प्राकृतिक आपदाओं के निवारण में समाज की भूमिका बढ़ाई जाए।
  4. विभाजनकारी ताकतों के विरुद्ध संगठित समाज को समाधान माना जाए।
  5. युवा समाज परिवर्तन के वाहक बनें और राष्ट्रनिर्माण में नेतृत्व निभाएं।

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