“सोने-चांदी के भाव में उछाल, 270 दिनों में रिकॉर्ड बढ़त और 1.5 लाख पार का अनुमान”
- सोना और चांदी के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं और इन धातुओं की कीमतें अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी अभी और जारी रह सकती है।
- दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में 50% तक की तेजी देखने को मिल सकती है। इस उछाल के पीछे मुख्य कारण जियो-पॉलिटिकल तनाव और आर्थिक अनिश्चितता हैं।
- सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी के दाम भी रोजाना नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, जिससे निवेशकों और बाजार में काफी उत्साह है।
2025 में सोना और चांदी ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों को भारी रिटर्न
इस साल की शुरुआत से लेकर 27 सितंबर 2025 तक सोना और चांदी में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। घरेलू मार्केट में 24 कैरेट सोना इस अवधि में लगभग 49% यानी ₹37,000 प्रति दस ग्राम तक महंगा हो गया है।
सिल्वर की बात करें तो चांदी ने इस साल 60% तक का रिटर्न दिया है। 2025 की शुरुआत से अब तक चांदी की कीमत ₹52,000 प्रति किलो बढ़ गई है।
IBJA के आंकड़ों के अनुसार,
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31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹76,162 था, जो 27 सितंबर 2025 को बढ़कर ₹1,13,262 हो गया।
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इसी तरह, चांदी का भाव 31 दिसंबर 2024 को ₹86,017 प्रति किलो था, जो 27 सितंबर 2025 को बढ़कर ₹1,38,100 प्रति किलो पहुँच गया।
इस उछाल ने निवेशकों और बाजार के जानकारों दोनों को प्रभावित किया है, और विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में यह तेजी आने वाले महीनों में भी जारी रह सकती है।
सोना और चांदी के दाम 1.5 लाख के पार जा सकते हैं, जानें कारण
- गोल्डमैन सैक्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के अंत तक सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस तक जा सकती है। मौजूदा एक्सचेंज रेट के हिसाब से यह भारत में लगभग ₹1,55,000 प्रति 10 ग्राम के बराबर होगी।
- वहीं, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में चांदी की कीमत भी ₹1.5 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती है। इसके पीछे मजबूत औद्योगिक मांग, सुरक्षित निवेश की प्रवृत्ति और डॉलर के कमजोर होने जैसे कारक हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं सोना और चांदी के दाम?
सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी के कई प्रमुख कारण हैं:
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केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: विश्व के बड़े केंद्रीय बैंक लगातार सोने में निवेश कर अपने भंडार को बढ़ा रहे हैं। इससे मांग बढ़ती है और कीमतों में तेजी आती है।
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World Gold Council के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने 2022 में 1,082 टन सोना खरीदा।
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2023 में इस संख्या में थोड़ी कमी हुई, लेकिन फिर भी 1,037 टन सोना खरीदा गया।
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2024 में खरीद फिर मजबूत रही और 1,044.6 टन सोना खरीदा गया, जो लगातार तीसरे वर्ष 1,000 टन से अधिक है।
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क्रिप्टो मार्केट का अस्थिर होना: क्रिप्टो में उतार-चढ़ाव बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं और सोने में पैसा लगा रहे हैं।
इन कारकों के चलते निवेशक गोल्ड और सिल्वर दोनों को सुरक्षित और लाभकारी निवेश मान रहे हैं, जिससे इनकी कीमतों में तेजी बनी हुई है।
