“उत्तराखंड में बाहरी लोगो को स्थायी निवासी बनाने वाला बड़ा रैकेट बेनकाब, जनसुनवाई की शिकायत से खुला पूरा मामला”
उत्तराखंड में बाहरी लोगों को स्थायी निवासी बनाने वाले फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
- उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से आए लोगों को गलत तरीके से स्थायी निवासी (डोमिसाइल) बनाने वाले एक संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है। यह गिरोह राज्य में रहने वाले उन्हीं नाम के निवासियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बाहरी लोगों को उत्तराखंडी पहचान उपलब्ध करा रहा था।
- जनसुनवाई के दौरान मिली शिकायत के बाद कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने कार्रवाई करते हुए बनभूलपुरा में मौके पर जांच की। यहां पता चला कि उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले रईस और जलीस के नाम पर फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
एक ही नाम वाले असली निवासियों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल
- जांच में यह भी पाया गया कि बनभूलपुरा में पहले से रहने वाले उसी नाम के वास्तविक व्यक्तियों के दस्तावेजों का गलत ढंग से उपयोग कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। प्रशासन को आशंका है कि इस तरह के सैकड़ों फर्जी डोमिसाइल बनाए जा चुके हैं।
- इसी के चलते आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि यह मामला गंभीर है और ऐसी अपराधी गतिविधियों के जरिए प्रदेश की जनसांख्यिकीय संरचना बदलने की कोशिश की जा रही है।
शिकायत से शुरू हुई पूरी कार्रवाई
- हाल ही में आयुक्त अपने हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में जनसुनवाई कर रहे थे, जहाँ बनभूलपुरा निवासी रईस ने बताया कि उसके नाम और दस्तावेजों का उपयोग कर किसी बाहरी व्यक्ति को उत्तराखंड का स्थायी निवासी घोषित कर दिया गया है। शिकायत मिलने के बाद आयुक्त ने तुरंत मामले की जांच शुरू की।
- गुरुवार को प्रशासनिक और पुलिस टीम के साथ बनभूलपुरा पहुंचने पर पता चला कि तहसील के अरायजनवीस फैजान मिकरानी ने बरेली से आए रईस और जलीस का स्थायी निवासी प्रमाण पत्र तैयार किया था। फैजान के घर से कई लोगों के आधार कार्ड, बिजली बिल और अन्य महत्वपूर्ण कागजात भी बरामद हुए।
- जिस सीएससी सेंटर से ये प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, वह जांच के दौरान बंद मिला।
ऑनलाइन सत्यापन में भी लापरवाही उजागर
- जांच में यह भी सामने आया कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों को संबंधित क्षेत्र के पटवारियों द्वारा ऑनलाइन सत्यापित भी किया गया था। इस पर आयुक्त ने एसडीएम को जांच का निर्देश दिया और संबंधित अरायजनवीस के लाइसेंस की जांच करने तथा बिना लाइसेंस के दस्तावेज लेखन करने वालों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए।
- एसडीएम राहुल शाह को एफआईआर दर्ज करने और सीओ सिटी नितिन लोहनी को आरोपियों से पूछताछ करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसे तैयार किया गया फर्जी स्थायी निवास
- आयुक्त की जांच में सामने आया कि फैजान मिकरानी ने बनभूलपुरा के वास्तविक रईस के मोबाइल नंबर पर OTP मंगाया, और इसी OTP की मदद से एक फर्जी ईमेल आईडी बनाई गई।
इसी ईमेल आइडी के प्रयोग से बरेली निवासी रईस का स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार कर दिया गया। - देवेंद्र पांडे नामक एक व्यक्ति जब आय प्रमाण बनाने के लिए फैजान के पास गया तो उसके मोबाइल नंबर से भी नया ईमेल बनाकर दस्तावेज तैयार कर लिए गए।
सरकारी विभागों की संभावित मिलीभगत
- आयुक्त की टीम को यह भी संकेत मिले कि इस रैकेट में ऊर्जा निगम और कुछ अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है। फैजान लगातार बिजली विभाग के एक कर्मचारी से संपर्क में था, जो उसके लिए बिजली के बिल उपलब्ध कराता था।
इन्हीं बिलों का उपयोग कर बाहरी लोगों के नाम से स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे। फैजान के घर से बड़ी संख्या में बिजली के बिल बरामद किए गए हैं।
