लाडपुर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, सेवा और संस्कार का गूंजा संदेश
- लाडपुर स्थित दुर्गा निवास में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन दिवस अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सात दिनों तक चली इस पावन कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

- समापन अवसर पर कथा वाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी ने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायक प्रवचनों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की सच्ची भक्ति वही कर सकता है, जो अपने माता-पिता की सेवा करता है। जो लोग माता-पिता की अवहेलना कर भक्ति का दिखावा करते हैं, वे वास्तविक अर्थों में भक्त नहीं बल्कि पाखंड करते हैं।
- उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने केवल माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए बिना किसी तर्क के राजपाट त्यागकर वन गमन किया। यह हमें सिखाता है कि माता-पिता की सेवा, आज्ञा पालन और पारिवारिक प्रेम ही सच्ची भक्ति का आधार है।
- अपने प्रवचन में आचार्य ममगाईं जी ने जीवन की समस्याओं पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकृति में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। उन्होंने कहा कि समस्याओं से भागने के बजाय उनका डटकर सामना करना चाहिए, क्योंकि मुकाबला करने से ही समाधान निकलता है।

- उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुःख बंदरों की तरह होते हैं—यदि हम उनसे डरकर भागते हैं तो वे हमारा पीछा करते हैं, लेकिन यदि हम उनका सामना करते हैं तो वे स्वयं दूर हो जाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में सकारात्मक सोच, धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा दी।
- समापन दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर
बिना नौटियाल, संतोष कुमार नौटियाल, कमला नौटियाल, डॉ. रीना कुलश्रेष्ठ, मानसी नौटियाल, विदूषी नौटियाल, सिद्धार्थ, योगेश गौनियाल, प्रनीत डबराल, निरजा डण्डरियाल, वैदेही, विशाल, जयन्ती जुयाल, दमयंती डंगवाल, अनिल डबराल, मधु डबराल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

- सात दिवसीय इस कथा के समापन पर पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने कथा से प्राप्त संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। यह आयोजन सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और अविस्मरणीय सिद्ध हुआ।
