उत्तराखंड के ‘घोस्ट विलेज’ अब बनेंगे होम स्टे हब, राज्यपाल बोले– स्थानीय युवाओं के लिए खुलेगा रोजगार का नया रास्ता
- उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा कि अब समय आ गया है जब राज्य को ‘घोस्ट विलेज’ से ‘होस्ट विलेज’ की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में होम स्टे जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के बाद अब ऐसे मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे रिवर्स पलायन (Reverse Migration) को बढ़ावा मिले और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलें।
- राज्यपाल ने यह विचार भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ (IAUA) द्वारा आयोजित सम्मेलन में व्यक्त किए, जो वीरचंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिक एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार (रानीचौरी, नई टिहरी) में आयोजित हुआ। सम्मेलन का विषय था – “भारत में कृषि-पारिस्थितिकी-पर्यटन: अवसर, चुनौतियां और आगे की राह”। इस मौके पर देशभर के 10 से अधिक राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
- राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी आग्रह किया है कि “उत्तराखंड के घोस्ट विलेज में ‘G’ हटाकर ‘H’ जोड़ दिया जाए”, ताकि वे अब ‘होस्ट विलेज’ कहलाएं और यहां खुशहाली और पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकें। इसके लिए सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है।
- इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा कि “पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि और पर्यटन का संगम राज्य की GDP को नई ऊंचाई देगा।” उन्होंने कहा कि एग्रो-इको टूरिज्म (Agro Eco-Tourism) पहाड़ी इलाकों से पलायन रोकने और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
- कार्यक्रम में कुलपति प्रो. परविंदर कौशल, टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, प्रतापनगर विधायक विक्रम नेगी, पद्मश्री प्रेमचंद्र शर्मा, और कई अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
