हरिद्वार में विश्व सनातन महापीठ का भव्य शुभारंभ, समारोह में चार अहम प्रस्ताव पास
- हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में तीर्थ सेवा न्यास द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में विश्व सनातन महापीठ का विधिवत शिलान्यास किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक विधि-विधान के बीच आयोजित इस समारोह में देशभर के धर्माचार्य, महंत, संत, और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
धर्मसभा में पारित हुए चार प्रस्ताव
शिलान्यास समारोह के दौरान विश्व सनातन महापीठ की ओर से चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें—
- गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने की मांग।
- देशभर में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने का प्रस्ताव।
- पूरे देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की वकालत।
- राष्ट्रीय स्तर पर एक देश–एक शिक्षा नीति लागू करने की मांग शामिल रही।
इन प्रस्तावों को कार्यक्रम में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने ध्वनिमत से समर्थन दिया।
वैश्विक आध्यात्मिक एकता पर बल
- परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि “एक विश्व, एक धर्म, एक ध्वज, एक ग्रंथ, एक विधान” केवल नारा नहीं, बल्कि विश्व के आध्यात्मिक एकीकरण का संदेश है। उन्होंने कहा कि इस विचार के मूल में भारतीय ऋषि परंपरा और सार्वभौमिक मानव कल्याण की भावना निहित है।
सनातन संस्कृति और संरक्षण का संकल्प
- तीर्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष हठयोगी बाबा और सचिव राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति, वेद, गुरुकुल परंपरा, गौ सेवा, गंगा-हिमालय संरक्षण, और योग के प्रचार-प्रसार को मजबूत आधार प्रदान करना महापीठ का प्रमुख उद्देश्य है।
शिक्षा को सनातन का मूल आधार बताया
- प्रसिद्ध कथावाचक डा. अनिरुद्धाचार्य महाराज और देवकीनंदन ठाकुर ने श्रद्धालुओं को महापीठ की भावनाओं और उद्देश्यों से अवगत कराया।
करौली शंकर महादेव ने कहा कि मूल्य-आधारित शिक्षा किसी भी समाज की नींव है। बिना शिक्षा समाज स्थिर नहीं रह सकता और बिना समाज धर्म सुरक्षित नहीं रह सकता। - उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व सनातन महापीठ का उद्देश्य केवल धार्मिक निर्माण नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, मानव निर्माण, और समाज निर्माण है।
हजारों संतों की मौजूदगी से गरिमामय हुआ आयोजन
कार्यक्रम में
- ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी
- अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी
- महंत मुरलीधरन
- अश्विनी उपाध्याय
- विष्णु शंकर जैन
- स्वामी सच्चिदानंद
- डा. गौतम खट्टर
- अविचल दास
- जगद्गुरु भैया जी महाराज
- राज राजेश्वर गुरु
- संजय आर्य शास्त्री
सहित हजारों संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
