Uttarakhand

वन्यजीव हमलों से बचाव के लिए गांवों के आसपास झाड़ी कटान तेज़ होगा, पंचायती राज मंत्री ने मनरेगा से कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

  • राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे वन्यजीव हमलों ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
  • उन्होंने कहा कि गांवों के आसपास और गांवों को जोड़ने वाले मार्गों पर उगी झाड़ियां जंगली जानवरों के छिपने का ठिकाना बन रही हैं, जिसके कारण लोग दहशत में हैं और कई जगह बच्चे भी स्कूल जाने से डर रहे हैं।

मनरेगा से होगा झाड़ी कटान, अनटाइड फंड का उपयोग

  • महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गांवों के आसपास उगी झाड़ियों का झाड़ी कटान (Bush Clearance) कार्य मनरेगा के माध्यम से कराया जाए। इस कार्य के लिए अनटाइड फंड का उपयोग करने को कहा गया ताकि यह प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ सके।
  • उन्होंने कैंप कार्यालय सुभाष रोड स्थित बैठक में वन विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।

गांवों में दहशत का माहौल, बच्चे नहीं जा पा रहे स्कूल

  • मंत्री महाराज ने बताया कि पर्वतीय जिलों में बसे गांवों के आसपास घनी झाड़ियां और जंगल वन्यजीवों के लिए छिपने के स्थान बन गए हैं। इससे ग्रामीणों में लगातार डर बना रहता है।
  • उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शादी समारोहों का सीजन भी चल रहा है, ऐसे में सुनसान रास्तों पर ग्रामीणों के साथ किसी भी दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए जल्द से जल्द सुरक्षा उपायों को लागू करना जरूरी है।

वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन पर भी दिया जोर

  • महाराज ने कहा कि जिन राष्ट्रीय उद्यानों और पार्कों का निर्माण वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किया गया है, उनमें जंगली जानवरों को सुरक्षित स्थान दिया जाना चाहिए।
  • उन्होंने सुझाव दिया कि बड़ी कंपनियों, संस्थानों और कॉर्पोरेट समूहों को वन्यजीवों को गोद लेने (Adoption Model) के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिससे उनके रखरखाव, खान-पान और देखभाल का खर्च पूरा हो सके।

एक बाघ की देखभाल पर 20–25 लाख वार्षिक खर्च

  • महाराज ने बताया कि यदि किसी बाघ को पकड़कर किसी पार्क में रखा जाता है, तो उसकी देखभाल, सुरक्षा और भोजन पर 20 से 25 लाख रुपए सालाना खर्च आता है। ऐसे में निजी संस्थानों की मदद लेना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
  • उन्होंने कहा कि मानव सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो रहे जंगली जानवरों को पकड़कर सुरक्षित रखने के लिए वह अंबानी परिवार द्वारा बनाए गए ‘बनतारा’ प्रोजेक्ट से भी सहयोग का अनुरोध करेंगे।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में

  • विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग मधुकर धकाते,
  • निदेशक पर्यावरण एसपी सुबुद्धि,
  • पंचायती राज निदेशक निधि यादव,
    सहित कई अधिकारी मौजूद रहे और पर्वतीय जिलों में वन्यजीव सुरक्षा और झाड़ी कटान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

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