Uttarakhand

सर्दियों का मिजाज बदला: 55 दिन से सूखा मौसम, उत्तराखंड–हिमाचल–कश्मीर में बर्फबारी का इंतज़ार

  • दिसंबर का दूसरा पखवाड़ा भी समाप्ति की ओर है, लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियां अब तक बर्फबारी के इंतजार में हैं। आमतौर पर इस समय तक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ जाती है, लेकिन इस बार सर्दियों का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है।
  • मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) इस सीजन कमजोर और निष्क्रिय बना हुआ है। इसी वजह से न तो पर्याप्त वर्षा हो रही है और न ही हिमपात। आंकड़ों के अनुसार, 1 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच करीब 45 से 55 दिन तक अधिकांश पर्वतीय राज्यों में बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। इससे पहले वर्ष 2009 में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी, जब दिसंबर के अंत में पहला हिमपात हुआ था।

मैदानी इलाकों में भी कम ठंड

  • इस बार मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड का असर अपेक्षाकृत कम है। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू और देहरादून जैसे शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है और कई जगह यह 24–25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। आमतौर पर दिसंबर में इन क्षेत्रों में कोल्ड डे कंडीशन देखने को मिलती है, लेकिन तेज धूप के कारण लोग दिन में गर्म कपड़े उतारते नजर आ रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

  • मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ, तो पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड का इंतजार और लंबा हो सकता है।
  • मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, ग्लोबल वॉर्मिंग, मौसम चक्र में बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ की कमजोर सक्रियता इसके प्रमुख कारण हैं। कई बार पोस्ट-मानसून सिस्टम दिसंबर के अंतिम दिनों में सक्रिय होता है, लेकिन फिलहाल इसके संकेत कमजोर हैं।

फसल चक्र पर असर

  • बारिश और बर्फबारी न होने का सीधा असर उत्तर भारत के फसल चक्र पर पड़ने लगा है। रबी फसलें जैसे गेहूं, सरसों और गन्ना नमी की कमी से प्रभावित हो रही हैं।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में मोटा अनाज, मटर, हरी सब्जियों और प्याज की खेती के लिए अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ रही है। वहीं, सेब उत्पादक किसान भी चिंतित हैं, क्योंकि अच्छी पैदावार के लिए दिसंबर की बर्फबारी बेहद अहम मानी जाती है।

उत्तराखंड में 55 दिन से बारिश नहीं

  • उत्तराखंड में आखिरी बार 22 अक्टूबर को कुछ घंटों की बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद केवल चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की वर्षा हुई, जबकि शेष प्रदेश लगभग सूखे की स्थिति में है।

चारधाम और पर्यटन स्थल बर्फबारी को तरसे

  • अब तक चारधाम की चोटियां, हर्षिल, औली, गोरसों, चोपता, मुनस्यारी, धारचूला, मिलम, जोहार घाटी, पंचाचूली और नंदा देवी क्षेत्र में ताजा हिमपात नहीं हुआ है। कुछ ऊंची चोटियां तो इस समय बर्फविहीन भी दिखाई देने लगी हैं, जिससे पर्यटन और कृषि दोनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *