उत्तराखंड: 60 मदरसों को मिला ‘अल्पसंख्यक स्कूल’ का दर्जा, आवेदन प्रक्रिया संपन्न
- राज्य में मदरसा बोर्ड भंग होने के तीन महीने बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था के तहत मदरसों को अल्पसंख्यक विद्यालय का दर्जा देने की कवायद जारी है। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर आवेदन करने की अंतिम तिथि बुधवार को समाप्त हो गई। इस अवधि तक विभाग केवल 60 मदरसों को ही अल्पसंख्यक विद्यालय के रूप में मान्यता दे सका है, जबकि 138 संस्थानों के आवेदन अब भी लंबित पड़े हैं।
35 संस्थानों को मिल चुके हैं प्रमाण पत्र
- मान्यता प्राप्त 60 संस्थानों में से 35 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अल्पसंख्यक विद्यालय का मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया जा चुका है, जबकि शेष 25 विद्यालयों को प्रमाण पत्र वितरित करने की प्रक्रिया जारी है। तीन महीनों में विभाग को कुल 198 आवेदन प्राप्त हुए थे।
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने शासन को सौंपी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की निस्तारण प्रक्रिया में तेजी लाने की सख्त आवश्यकता है। प्राधिकरण ने अक्टूबर माह तक कम से कम 100 अल्पसंख्यक विद्यालयों को मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाण पत्र दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
हरिद्वार में सबसे ज्यादा संस्थान
- अब तक मान्यता प्राप्त 35 संस्थानों में सबसे ज्यादा 26 हरिद्वार जिले से हैं, जिनमें 22 मदरसे और 2 सिख समुदाय से जुड़े संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा देहरादून के 7 और ऊधम सिंह नगर के 2 संस्थानों को मान्यता मिली है।
90 दिनों के भीतर प्राधिकरण की प्रमुख कार्रवाई
- कुल संख्या: राज्य के सात जिलों में कुल 452 मदरसे संचालित थे (400 सीनियर व 52 जूनियर)। इनमें सर्वाधिक 270 हरिद्वार में, जबकि अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में सबसे कम 1-1 मदरसा था।
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बंद हुए मदरसे: प्रदेश में 227 मदरसे बंद हो चुके हैं, जिनमें 107 पहले से बंद थे और 120 पर हाल ही में ताले लगे।
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पंजीकरण व मान्यता: पोर्टल पर 198 मदरसों ने आवेदन किया, जिनमें से 60 को मान्यता मिली तथा 138 के मामले लंबित हैं।
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कड़ा एक्शन: अवैध रूप से संचालित 19 मदरसों को सील किया गया है, जबकि 3 मदरसों ने न तो मान्यता के लिए आवेदन किया और न ही बंद होने की कोई सूचना दी।
मध्याह्न भोजन (MDM) को लेकर फंसा पेंच
- अल्पसंख्यक विद्यालय के रूप में मान्यता प्राप्त 35 संस्थान अब मध्याह्न भोजन योजना के पात्र बन गए हैं। प्राधिकरण ने इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देश पत्र शिक्षा सचिव को सौंप दिए हैं, जिसके बाद शिक्षा विभाग योजना के क्रियान्वयन की व्यवस्था में जुट गया है।
