दून की मॉडल रोड पर पैदल यात्रियों का हक छिना! फुटपाथों पर कब्जे से बढ़ी परेशानी
- देहरादून। राजधानी देहरादून की मॉडल रोड परियोजना का उद्देश्य शहर को आधुनिक और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। आईएसबीटी से घंटाघर तक फैले मार्ग पर बने फुटपाथों का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों की चपेट में दिखाई दे रहा है, जिससे आम लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- शहर के विभिन्न हिस्सों में फुटपाथों पर वाहन खड़े होने, दुकानों के विस्तार, गैराज संचालन और अन्य गतिविधियों के कारण पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान लगातार सिमटता जा रहा है। परिणामस्वरूप लोगों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
- हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि फुटपाथों पर पहला अधिकार पैदल चलने वालों का है और इन्हें अतिक्रमण या पार्किंग के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर फुटपाथों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
- वर्ष 2017 में शुरू की गई मॉडल रोड योजना के तहत सड़क को आधुनिक स्वरूप देने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर फुटपाथों की उपयोगिता लगातार कम होती जा रही है।
- विशेष रूप से माजरा, पटेलनगर, गांधी रोड, लालपुल और घंटाघर क्षेत्र में फुटपाथों पर अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग की समस्या अधिक दिखाई देती है। कई स्थानों पर वाहन मरम्मत केंद्र और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी फुटपाथों का उपयोग कर रही हैं, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
- शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कर नियमित निगरानी की जाए, तो पैदल यात्रियों को सुरक्षित आवागमन का अधिकार मिल सकता है। नागरिकों ने भी प्रशासन से मॉडल रोड को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप विकसित करने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
