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UPI New Rule: ₹10,000 के UPI पेमेंट पर कितना कटेगा GST? दुकानदार, बैंक या ऐप—कौन देगा टैक्स? जानें पूरा गणित!

यूपीआई (UPI) से ₹10,000 ट्रांसफर करने पर हमको भारी-भरकम टैक्स चुकाना होगा, तो राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक भ्रामक सूचना तेजी से फैल रही है कि बड़े यूपीआई भुगतानों पर 18% जीएसटी (GST) वसूल किया जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय के ताजा दिशानिर्देशों ने इस अफवाह की हवा निकाल दी है। सच यह है कि आम ग्राहकों की जेब से एक नया पैसा भी नहीं कटेगा।

क्या है अफवाह और क्या है हकीकत?

  • दावा: ₹10,000 के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर सीधे 18% यानी ₹1,800 का जीएसटी लगेगा।
  • सच्चाई: जीएसटी पूरी मूल राशि पर नहीं, बल्कि केवल मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी पेमेंट प्रोसेसिंग फीस पर लगेगा।

3 पॉकेट में समझते हैं ₹10,000 का यह गणित

विशेष रूप से इस ट्रांजैक्शन को तीन हिस्सों में बांटा गया है:

विवरण राशि/दर भार (किसकी जेब पर?)
मूल भुगतान (Transaction Value) ₹10,000 ग्राहक: खाता से केवल ₹1,000 कटेंगे।
मर्चेंट शुल्क (MDR Fee – 0.4%) ₹40 व्यापारी: बैंक और ऐप इसे दुकानदार से लेंगे।
जीएसटी (GST – MDR का 18%) ₹7.20 व्यापारी: यह टैक्स भी सिर्फ दुकानदार पर लागू है।
कुल प्रभावी अतिरिक्त लागत ₹47.20 (0.472%) ग्राहक के लिए यह 100% मुफ्त है।

 ग्राहक सुरक्षित, दुकानदारों को ‘क्रेडिट‘ कवच

  • सरकार ने बैंकों और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को सख्त निर्देश दिए हैं कि मर्चेंट किसी भी हाल में इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
  • व्यापारियों के मन में यह डर था कि इससे उनकी जेब कटेगी। लेकिन एनपीसीआई (NPCI) के मुताबिक, जीएसटी के तहत पंजीकृत (GST-registered) दुकानदार इस ₹7.20 के टैक्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकते हैं। यानी बिक्री के समय बनने वाली उनकी कुल टैक्स देनदारी में से यह राशि घटा दी जाएगी, जिससे उनका वास्तविक नुकसान ‘शून्य’ के बराबर हो जाएगा।

आम जनता के काम की हैं ये 3 बड़ी बातें

  1. 96% मर्चेंट सुरक्षित: देश में होने वाले कुल यूपीआई भुगतानों में से 96 फीसदी ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के होते हैं। इन पर कोई चार्ज या टैक्स लागू नहीं है।
  2. निजी ट्रांसफर पर नो टैक्स: अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या दूध-सब्जी वाले के व्यक्तिगत खाते (P2P) में पैसे भेज रहे हैं, तो चाहे राशि ₹10,000 हो या ₹50,000, यह पूरी तरह फ्री रहेगा।
  3. मैक्सिमम कैपिंग: बड़े कॉरपोरेट ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट फीस को अधिकतम ₹300 पर फ्रीज (कैप) कर दिया गया है।

 

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