देहरादून की हरियाली खतरे में, विकास परियोजनाओं के चलते कट सकते हैं 20 हजार पेड़
- देहरादून जिले के साल के जंगलों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। साल के पेड़ों पर होपलो कीट (Sal Borer Insect) के बढ़ते प्रकोप से हजारों पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। यह कीट पेड़ों को भीतर से खोखला कर देता है, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ जाता है।
- देहरादून वन प्रभाग में इसका असर सबसे अधिक देखा जा रहा है। इसके अलावा कालसी और मसूरी वन प्रभाग भी इस कीट के चपेट में हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने वन अनुसंधान संस्थान (FRI) से मदद मांगी है। एफआरआई की टीम ने देहरादून में निरीक्षण कर लिया है, जबकि अन्य प्रभागों में सर्वे प्रस्तावित है।
- वन विभाग के अनुसार देहरादून में करीब 12 हजार, कालसी में 5 हजार और मसूरी में 3 हजार से अधिक साल के पेड़ होपलो से प्रभावित हो सकते हैं। जिले के इन तीनों प्रभागों में साल वनों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
- एफआरआई के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अरुण प्रताप के मुताबिक, होपलो का कोई स्थायी इलाज नहीं है। अत्यधिक संक्रमित पेड़ों को काटकर नष्ट करना ही एकमात्र उपाय है, जबकि कम प्रभावित पेड़ों में फेरोमोन ट्रैप और कीटनाशक उपचार किया जाता है।
- हर साल सामान्य तौर पर प्रत्येक वन प्रभाग में लगभग 2 हजार पेड़ इस कीट के कारण काटने पड़ते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष प्रकोप अधिक होने से पेड़ों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे देहरादून की हरियाली पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
