“संसद में कांग्रेस पर पीएम मोदी का तीखा वार— वंदे मातरम् को लेकर उठाए सवाल”
- लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर हुई विशेष चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में पार्टी ने वंदे मातरम् के सम्मान से समझौता किया और इसे विभाजित करने का निर्णय लिया।
- पीएम मोदी ने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना ज़रूरी है कि किन परिस्थितियों में राष्ट्रगीत के साथ “विश्वासघात” हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की राजनीति ने देशहित के बजाय वोटबैंक को प्राथमिकता दी।
नेहरू, जिन्ना और ऐतिहासिक विवाद का जिक्र
- चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने 1937 में मुस्लिम लीग के बढ़ते विरोध के बीच वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मोहम्मद अली जिन्ना ने राष्ट्रगीत का विरोध करते हुए राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया, और कांग्रेस ने इसके दबाव में 26 अक्टूबर 1937 को इसके उपयोग की समीक्षा का निर्णय लिया।
- पीएम मोदी के अनुसार, यह निर्णय देशभर के राष्ट्रभक्तों को हैरान कर देने वाला था, जिन्होंने विरोध में प्रभात फेरियाँ निकालकर वंदे मातरम् का गान किया।
आपातकाल की याद भी दिलाई
- प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् के 100 वर्ष पूरे होने पर देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा था, और संविधान की स्वतंत्रता को दबा दिया गया था।
टीएमसी के साथ हल्की नोकझोंक
- चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को “बंकिम दा” कहने पर तृणमूल कांग्रेस ने आपत्ति जताई। इसके बाद पीएम मोदी ने “बंकिम बाबू” कहकर उनकी भावनाओं का सम्मान किया।
भाजपा सदस्यों के नारे
- प्रधानमंत्री के सदन में प्रवेश करते ही भाजपा सांसदों ने “अब बंगाल की बारी” और वंदे मातरम् के नारे लगाकर उनका स्वागत किया।
