उत्तराखंड गंगा घाट नियम: गैर-हिंदुओं की एंट्री पर 72 वर्षों से रोक, नाममात्र जुर्माना तय
- हरिद्वार और ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित करने और हर की पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश प्रतिबंध को लेकर सरकार में मंथन तेज हो गया है।
- अध्ययन में सामने आया है कि यह व्यवस्था नई नहीं, बल्कि नगर पालिका उपविधि 1953 में पहले से दर्ज है। इसके अनुसार सरकारी कार्य से आए अधिकारियों को छोड़कर अहिंदुओं का हर की पैड़ी और कुशावर्त घाट में प्रवेश वर्जित था। नियम तोड़ने पर 10 रुपये तक जुर्माना और बार-बार उल्लंघन पर प्रतिदिन अतिरिक्त दंड का प्रावधान भी है।
- धार्मिक संगठनों का कहना है कि पहले हरिद्वार में 5–7 घाट थे, जबकि अब इनकी संख्या 105 से अधिक हो चुकी है, इसलिए यह नियम सभी घाटों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। इसके समर्थन में 1916 में पं. मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश शासन के बीच हुए समझौते का भी हवाला दिया जा रहा है।
- इसके साथ ही शराब और मांस बिक्री को लेकर भी सख्ती की मांग उठी है। नियमों के अनुसार ज्वालापुर क्षेत्र के अलावा कहीं मांस बिक्री की अनुमति नहीं, और विक्रेताओं को दुकान पर पूरा नाम, पता और मांस का प्रकार लिखना अनिवार्य है।
- यह मुद्दा जहां एक ओर धार्मिक परंपरा और आस्था की रक्षा से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर संवैधानिक अधिकार, समानता और कानून के संतुलन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बना हुआ है।
