“उत्तराखंड को पर्वतीय पर्यटन विकास के लिए मिला 284 करोड़ का बड़ा समर्थन, केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने संसद में दी जानकारी”
- उत्तराखंड में पर्वतीय पर्यटन विकास को लेकर केंद्र सरकार लगातार महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है। पिछले कई वर्षों में राज्य के पर्यटन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र की ओर से 284 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न योजनाओं के तहत जारी की जा चुकी है। यह जानकारी संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सामने आई।
- लोकसभा में नैनीताल-उधमसिंहनगर सांसद अजय भट्ट द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि उत्तराखंड सहित सभी हिमालयी राज्यों में पर्वतीय पर्यटन सर्किट के विकास पर बड़ा निवेश किया जा रहा है। शेखावत ने कहा कि स्वदेश दर्शन, स्वदेश दर्शन 2.0, प्रसाद योजना, सीबीडीडी, और एसएएससीआई जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत हिमालयी क्षेत्र में कुल 1726.74 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 1200.46 करोड़ रुपये जारी भी हो चुके हैं।
उत्तराखंड में पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी और वित्तीय सहायता मिली है। इनमें प्रमुख हैं—
- केदारनाथ एकीकृत विकास परियोजना: वर्ष 2015-16 में 34.77 करोड़ रुपये जारी किए गए।
- बदरीनाथ धाम तीर्थ सुविधा विस्तार: वर्ष 2018-19 में 56.15 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए, जिनमें से 38.38 करोड़ पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
- गंगोत्री–यमुनोत्री धाम विकास: कुल 54.36 करोड़ में से 10.5 करोड़ अब तक जारी।
- ऋषिकेश राफ्टिंग बेस स्टेशन विकास: वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 100 करोड़ में से 66 करोड़ जारी किए गए।
- इसके अलावा, चंपावत के टी-गार्डन अनुभव, पिथौरागढ़ के गूंजी ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर, माणा और जादूंग के वाइब्रेंट विलेज प्रोजेक्ट, तथा कुमाऊं क्षेत्र में विरासत परिपथ विकास जैसी परियोजनाओं को भी केंद्र से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ है।
- साथ ही, टिहरी झील क्षेत्र में साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जिससे राज्य में एडवेंचर टूरिज्म को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद है।
- इन निवेशों का उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन आकर्षण बढ़ाना, स्थानीय रोजगार सृजित करना, और आधारभूत संरचना को मजबूत करना है, ताकि राज्य आने वाले वर्षों में पर्यटन का और बड़ा केंद्र बन सके।
