“उत्तराखंड सड़क सुरक्षा में चिंता का संकेत: प्रति 100 दुर्घटनाओं में मौतों के मामले में छठे स्थान पर राज्य”
- उत्तराखंड की सड़कें बढ़ती दुर्घटनाओं और मौतों के मामले में चिंता का विषय बन गई हैं। राज्य में न केवल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि इन हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है।
- हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड प्रति 100 सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में देश में 6वें स्थान पर है। इसके विपरीत, हिमाचल प्रदेश जैसे समान भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य इस मामले में 20वें स्थान पर हैं।
- पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिति और भी गंभीर है। यहां 100 दुर्घटनाओं में लगभग 105 लोगों की जान जाती है, जबकि पूरे राज्य का औसत 69.53 प्रतिशत है। राष्ट्रीय औसत केवल 36 प्रतिशत है, जो उत्तराखंड की स्थिति को और चिंताजनक बनाता है।
दुर्घटनाओं के आंकड़े
- वर्ष 2023 में प्रदेश में कुल 1,691 सड़क दुर्घटनाएं हुईं।
- वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,747 हो गई।
- 2025 के शुरुआती सात महीनों (जनवरी-जुलाई) में 1,184 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 717 व्यक्तियों की मौत हुई।
सड़क सुरक्षा प्रयास
- राज्य सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर इसके प्रभाव सीमित दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अभियान चलाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार, सड़क निगरानी और कड़े नियम लागू करना आवश्यक है।
- उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। प्रति 100 दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में राज्य देश में छठे स्थान पर है। इस सूची में सबसे ऊपर नागालैंड, दूसरे स्थान पर बिहार और तीसरे स्थान पर झारखंड हैं। चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमशः पंजाब और मेघालय हैं। यह आंकड़ा केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ई-डीएआर) में भी दर्ज किया गया है।
- अपर आयुक्त परिवहन, एसके सिंह ने कहा कि राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सख्त निगरानी, नियम पालन और जागरूकता अभियान लागू किए जा रहे हैं।
प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, वाहन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण चालक की लापरवाही है। इसमें शामिल हैं:
- तेज रफ्तार और नियंत्रित गति का पालन न करना
- रेड लाइट का उल्लंघन
- चालक का ध्यान भटकना या थका होना
पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटनाओं के अन्य प्रमुख कारण हैं:
- तेज मोड़ और कठिन रास्ते
- क्रैश बैरियर का अभाव
- खराब सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर
