उत्तराखंड जल संकट की चेतावनी: कम वर्षा-बर्फबारी से गर्मियों में घटेगा नदी प्रवाह
- उत्तराखंड में इस वर्ष शीतकालीन वर्षा और बर्फबारी की भारी कमी से आने वाला ग्रीष्मकाल चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार बीते 73 दिनों से प्रभावी बारिश नहीं हुई, जिससे पहाड़ से मैदानी क्षेत्रों तक सूखे जैसे हालात बन गए हैं।
- विशेषज्ञों का कहना है कि कम बर्फबारी के कारण मार्च–अप्रैल में ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया धीमी रहेगी। इसका सीधा असर गंगा और यमुना सहित अन्य नदियों की जलधारा पर पड़ेगा। मई तक 10–12% तक जल प्रवाह घटने की आशंका है, जिससे पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
- वीर माधो सिंह भंडारी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार कम वर्षा से हिमालयी जैव विविधता, जड़ी-बूटियों, और भूजल रिचार्ज पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
- वहीं, कृषि क्षेत्र भी संकट में है। गेहूं, सरसों, दालें और सेब जैसी नकदी फसलें प्रभावित हो रही हैं। पर्याप्त चिलिंग टाइम न मिलने से सेब उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
- विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन, कम होती वर्षा-बर्फबारी और तेजी से पिघलते ग्लेशियर भविष्य में जल संकट को और गंभीर बना सकते हैं। यह स्थिति पानी के अधिकार, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा बड़ा मानवाधिकार मुद्दा बनती जा रही है।
