Uttarakhand

भालू के आतंक से उजड़ा गांव, उत्तराखंड में परिवारों का पलायन

  • उत्तराखंड में वन्यजीवों के बढ़ते हमले अब ग्रामीण इलाकों के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। पौड़ी जिले के पोखड़ा विकासखंड की ग्रामसभा पणिया के बस्ताग गांव का मामला इसका ताजा उदाहरण है।
  • पहले से ही प्रवासन की मार झेल रहे इस गांव में रह रहे एकमात्र परिवार ने भी आखिरकार गांव छोड़ दिया। वजह बनी भालू का आतंक, जिसने परिवार की आजीविका की रीढ़ तोड़ दी। बीते एक सप्ताह के भीतर भालू ने परिवार के छह मवेशियों—दुधारू गाय, बैलों की जोड़ी और बकरियों—को मार डाला। इसके अलावा भालू का घर के आंगन तक पहुंचना परिवार के लिए जानलेवा खतरा बन गया।
  • बस्ताग गांव पहले से ही भालू हमलों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता रहा है। गांव के अधिकांश परिवार पहले ही अन्य स्थानों पर बस चुके थे और अब हरीश प्रसाद नौटियाल अपने परिवार के साथ यहां रहने वाले अंतिम ग्रामीण थे। लगातार हमलों और सुरक्षा के अभाव के चलते यह परिवार अब पड़ोसी गांव में शरण लेने को मजबूर हो गया है। आजीविका के किसी वैकल्पिक साधन के न होने से परिवार के सामने गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
  • इस गांव के पूरी तरह खाली हो जाने से उत्तराखंड में निर्जन हो चुके गांवों की संख्या बढ़कर 1727 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह गांवों का खाली होना राज्य के सामाजिक और आर्थिक भविष्य के लिए चिंता का विषय है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए अब नई और प्रभावी रणनीति बनाकर उसे जमीन पर उतारने की आवश्यकता है, ताकि जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रह सकें।
  • इधर, वन विभाग के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आरके मिश्र ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही भालू द्वारा मारे गए सभी मवेशियों का मुआवजा तत्काल देने के आदेश भी दिए गए हैं।
  • आरके मिश्र ने बताया कि गांव छोड़ने वाले परिवार से वापसी के लिए आग्रह किया जाएगा और विभाग की ओर से हरसंभव सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कदम उठा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *