उत्तरकाशी में सेवा ज्योति यात्रा की शुरुआत, पीएम मोदी बोले— ‘महत्वाकांक्षा नहीं, मिशन ही जीवन का आधार’
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को उत्तरकाशी में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ और ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ के दौरान वर्चुअल माध्यम से जनता को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।
- संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने जीवन दर्शन को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में उनका उद्देश्य व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि निर्धारित लक्ष्य और कर्तव्य के प्रति समर्पण रहा है।
कर्म ही मेरा धर्म, चुनाव लड़वाने वाला रहा हूँ
- अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “मैं एंबीशन (महत्वाकांक्षा) के लिए नहीं, बल्कि मिशन के लिए जीने वाला व्यक्ति हूँ। मैं चुनाव लड़ने वाला नहीं, बल्कि चुनाव लड़वाने वाला रहा हूँ। मेरे लिए कर्म ही सब कुछ है और कर्म ही मेरा धर्म है। मेरा अधिकार केवल कर्म पर है और मैं कर्म को ही अपना कर्तव्य मानता हूँ।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्म और कर्तव्य की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए देश की सेवा करना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
वर्ष 2026 में विकसित भारत का सपना होगा पूरा
- प्रधानमंत्री ने भारत के उज्ज्वल भविष्य पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में भारत ने जो ‘विकसित भारत’ का सपना देखा है, वह जरूर पूरा होगा। उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि वे अभूतपूर्व, असाधारण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के साथ-साथ देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने और गरीबी को पूरी तरह मिटाने जैसे बड़े लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें।
जनता का अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत
- पीएम मोदी ने देशवासियों द्वारा मिले समर्थन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “भारत जैसी पुण्य भूमि कोई और नहीं हो सकती। जिस भारत ने पूरी दुनिया को ज्ञान की रोशनी दी, उसकी सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है। देश ने मुझे जो विश्वास दिया है, वही मेरी सबसे बड़ी शक्ति रहा है।”
गुजरात के अनुभव से मिली जमीनी समस्याओं की समझ
- गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ‘गुजरात के विकास से देश का विकास‘ के मंत्र पर काम किया था।
“तब मेरे पास प्रशासनिक व्यवस्था का बहुत अनुभव नहीं था, लेकिन जनता का विश्वास मेरे साथ था। मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे यह समझने का मौका मिला कि जमीन पर वास्तविक समस्याएं क्या होती हैं, फाइलें कहां और क्यों अटकती हैं और समाधान में क्या बाधाएं आती हैं। वही अनुभव आज भी मेरे काम आ रहा है।” — नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री
2014 से ‘प्रधान सेवक’ के रूप में देश सेवा, बदला ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ का दौर
- पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में सेवा का विस्तार हुआ और उन्हें देश के ‘प्रधान सेवक’ का दायित्व मिला। उस समय देश के सामने अनेक चुनौतियां थीं, हर तरफ समस्याएं थीं और महंगाई आसमान छू रही थी। पहले के समय में वैश्विक संकट आते ही भारतीय अर्थव्यवस्था चरमरा जाती थी और ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ (नीतिगत अपाहिजपन) जैसे शब्दों की चर्चा होती थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने त्वरित निर्णय लेने और नीतियों को पारदर्शी तरीके से धरातल पर लागू करके स्थितियों को बदलने में सफलता पाई है।
