चमोली के तमक नाले का पुराना है आपदा इतिहास, बार-बार पुल बहने से नीती घाटी का संपर्क टूटता रहा
- चमोली के तमक नाले में आपदा और बाढ़ की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। यहां पहले भी कई बार पुल बह चुके हैं। सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर बीआरओ ने आरसीसी पुल का निर्माण कराया था, जिसे ऊंचाई और सुरक्षा मानकों के लिहाज से सुरक्षित माना गया था, लेकिन करीब एक साल पहले यह पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गया।
- इसके बाद आवाजाही बहाल करने के लिए ह्यूम पाइप के जरिए पानी की निकासी की व्यवस्था कर अस्थायी सड़क तैयार की गई। साथ ही वैली ब्रिज लगाकर यातायात को दोबारा सुचारू किया गया। अब एक बार फिर पुल के बहने से नीती घाटी और सीमा क्षेत्र की आवाजाही प्रभावित हुई है।
- तमक नाले में इससे पहले भी बाढ़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 31 अगस्त 2025 को भारी बारिश के बाद तमक नाले में बाढ़ आई थी, जिसके कारण ज्योतिर्मठ-मलारी राजमार्ग पर बना सीमेंट-कंक्रीट का पुल बह गया था। पुल टूटने से नीती घाटी के एक दर्जन से अधिक गांवों के साथ ही सीमा क्षेत्र में तैनात सेना का सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ था।
- तमक नाले से करीब पांच किलोमीटर आगे स्थित जुम्मा मोटर पुल भी करीब तीन साल पहले इसी तरह बाढ़ की चपेट में आकर बह गया था। जोशीमठ-मलारी हाईवे नीती घाटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है। इस मार्ग पर पुल के क्षतिग्रस्त होने से पूरी नीती घाटी का संपर्क प्रभावित हो जाता है।
- तमक नाले में पुल बहने से तमक, जुम्मा, कागा, गरपक, द्रोणागिरी, जेलम, कोषा, मलारी, कैलाशपुर, मेहरागांव, फर्किया, बांपा और गामशाली समेत नीती घाटी के 14 से अधिक गांवों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा भारत-चीन सीमा पर तैनात ITBP और सेना की चौकियों तक पहुंच भी बाधित हुई है। सेना के लिए नीती घाटी और सुमना घाटी तक पहुंचने का यह प्रमुख सड़क मार्ग है।
- स्थानीय लोगों के अनुसार तमक नाले का आपदा इतिहास काफी पुराना है। तमक गांव के लोगों का कहना है कि इस नाले का उद्गम ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों से होता है। बारिश के दौरान बुग्याल क्षेत्र में भारी पानी जमा होने पर नाले का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे यहां बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
- तमक नाला कुछ दूरी आगे जाकर धौलीगंगा नदी में मिल जाता है। धौलीगंगा आगे जोशीमठ के पास अलकनंदा नदी में मिलती है। यही वजह है कि तमक नाले में अचानक आने वाला तेज बहाव आसपास के क्षेत्र के लिए खतरा बढ़ा देता है।
- पिछले दो वर्षों के दौरान तमक नाले के उफान के कारण धौलीगंगा में झील जैसी स्थिति भी बन चुकी है। इसके बाद प्रशासन को सर्दियों के दौरान जेसीबी मशीनों की मदद से धौलीगंगा में जमा मलबा हटाकर पानी के निकास का रास्ता बनाना पड़ा था। इस झील को लेकर वैज्ञानिकों ने भी चिंता जताई थी।
- तमक नाले में बार-बार आने वाली बाढ़ और पुलों के बहने की घटनाएं नीती घाटी के लोगों के साथ-साथ सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के लिए भी बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी और सुरक्षित सड़क संपर्क बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
