Uttarakhand

Waste Segregation Rule: 1 अप्रैल से चार तरह की कचरा छंटाई, उत्तराखंड में चुनौती बरकरार

  • 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली (Solid Waste Management Rules) लागू होने जा रही है, जिसके तहत अब कचरे को केवल गीले और सूखे में नहीं, बल्कि चार अलग-अलग श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य कचरे के बेहतर प्रसंस्करण और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है, लेकिन उत्तराखंड में इस व्यवस्था को तुरंत लागू करना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
  • राज्य में फिलहाल स्रोत स्तर पर गीला-सूखा कचरा पृथक्करण ही पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति और भी कमजोर है, जहां आज भी कई घरों में पूरा कचरा एक ही डिब्बे में डाला जाता है। ऐसे में चार डस्टबिन की अनिवार्यता शहरी निकायों के लिए कठिन परीक्षा बन सकती है।
  • स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार देहरादून में लगभग 60 प्रतिशत, हरिद्वार में 55 प्रतिशत और ऋषिकेश में 50–55 प्रतिशत घरों में ही गीला-सूखा कचरा अलग किया जा रहा है।
    हल्द्वानी (50%), रुद्रपुर (45–50%) और काशीपुर (40–45%) की स्थिति भी बेहतर नहीं है। वहीं अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी शहरों में यह आंकड़ा सिर्फ 30 से 40 प्रतिशत के बीच है। शहरी विकास विभाग का मानना है कि वास्तविक स्थिति इससे भी कमजोर है।

चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण व्यवस्था

  • गीला कचरा: रसोई अपशिष्ट, फल-सब्जी के छिलके, फूल, मांस
  • सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु
  • स्वच्छता अपशिष्ट: डायपर, सैनिटरी पैड, टैम्पोन, कंडोम
  • हानिकारक अपशिष्ट: पेंट डिब्बे, बल्ब, थर्मामीटर, दवाइयां

नई व्यवस्था लागू करना क्यों मुश्किल

  • चार-स्तरीय व्यवस्था के लिए घरों और प्रतिष्ठानों में चार डस्टबिन, कचरा संग्रह वाहनों में अलग-अलग खांचे और विशेष प्रसंस्करण केंद्र जरूरी होंगे। लेकिन उत्तराखंड के अधिकांश नगर निकायों के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही पर्याप्त स्वच्छता कर्मी, जिससे यह नियम तुरंत लागू किया जा सके।

नियम तोड़ने पर लगेगा पर्यावरणीय जुर्माना

  • नए नियमों में प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर व्यक्ति, संस्था या थोक कचरा उत्पादक पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, पर्याप्त तैयारी के बिना सख्ती आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

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