एक ही मंच से दो रूप- UN में ट्रंप ने कही शांति की बात और दी तबाही की चेतावनी
- अपने बेबाक बयानबाजी से दुनियाभर में चर्चा का विषय बने रहना अमेरिका के राष्ट्रपति को शायद अच्छा लगता है, तभी तो वे जहां जाते हैं कुछ ऐसी बात बोल देते है, जिसको लेकर वैश्विक मंच गर्म हो जाता है, और दुनिया उनके बयान को लेकर चर्चा करने में लग जाती है, ट्रंप किसी नए मंच और नई बयानबाजी की खोज में लग जाते है।
- एक बार फिर ट्रंप अपने बयान को लेकर चर्चा के विषय में है। इस बार मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का था, जहां ट्रंप ने खुद को आठ युद्ध खत्म करने वाला शांतिदूत‘ बताया, वही दूसरी तरफ ईरान को तबाह करने और नर्क में भेजने जैसी तीखी धमकियां भी दी, जिसने वहां बैठे सभी लोगों को हैरान कर दिया।
मंच एक, लेकिन ट्रंप के रूप दो मायने क्या?
- UNGA के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका कारण है कि इस भाषण में ट्रंप का दो अलग-अलग रूपों में सामने आना हर किसी एक को हैरान कर गया, एक तरफ वे खुद को दुनिया भर में ‘आठ युद्ध खत्म करने वाला शांतिदूत’ बता रहे थे, तो वही दूसरी तरफ ईरान को तबाह करने और नर्क में भेजने जैसी धमकियां भी दे रहे थे।
- ऐसे तनाव के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में किस तरह की अनिश्चित और आक्रामक कूटनीति पर चल रहे हैं।
ट्रंप का अनोखा स्वभाव..खुद की तारीफ़ खुद करना
- पहले भाषण के शुरुआत में ट्रंप ने अपने उन दावों को दोहराया, जिन्हें वे अपनी सबसे बड़ी सफलता मानते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में दुनिया भर के आठ पुराने विवादों और युद्धों को सुलझाया है।
- इनमें कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, आर्मेनिया-अजरबैजान, गाजा और भारत-पाकिस्तान के बीच के विवाद शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने खास रिश्तों और टैरिफ के इस्तेमाल व धमकियों को दिया।
भारत-पाकिस्तान को लेकर गाया पुराना राग
- ट्रंप ने दावा किया कि पिछले साल उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति समझौता करवाया था। उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की तरफ से कहा कि ट्रंप ने 3 करोड़ से अधिक लोगों की जान बचाई है।
- जबकि भारत हमेशा से इस दावे को मानता है। भारत का निष्पक्ष कहना रहा है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय दोनों देशों के सैनिक संचालन महानिदेशकों (DGMO) की सीधी बातचीत से हुआ था।
शांतिदूत से कैसे ‘विनाश‘ की धमकी देने लगे ट्रंप
- ट्रंप शांतिदूत से सीधे विनाश की धमकी देने पर उतर गए और फिर भाषण के दूसरे हिस्से में ट्रंप का अंदाज पूरी तरह बदल गया। डीलमेकर के विषय से बाहर निकलकर वे सीधे ईरान पर हमलावर हो गए।
- ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि ईरान के पास दो ही रास्ते हैं, या तो अमेरिका के साथ समझौता करे या फिर इस्लामिक गणराज्य के विनाश के लिए तैयार रहे।
नर्क में भेजने तक की धमकी दी
- राष्ट्रपति ने कह दिया कि क्या वे ईरान को बिना किसी जीवित रहने के अवसर के सीधे नर्क में भेज दें? इसके अलावा ट्रंप ने यह भी अजीब दावा किया कि ईरान इस बात का इंतजार कर रहा है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में क्या होता है। ट्रंप खुद उन चुनावों में उम्मीदवार नहीं हैं।
यूएन पर साधा निशाना और फिर बोर्ड ऑफ पीस को बताया आधार
- ट्रंप ने भाषण में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC), यूएन के जलवायु एजेंडे और यूनेस्को की जमकर आलोचना की और फिर उन्होंने जनवरी में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाने का जिक्र किया और यह संकेत भी दिए कि भविष्य में उनका नया संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) की जगह भी ले सकता है।
ये कौन सी दुनिया चाहते हैं ट्रंप?
- ऐसे तनाव के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह भाषण इस बात का उदाहरण है कि वे अपनी चलने वाली दुनिया चाहते हैं। एक तरफ वे खुद को वैश्विक शांति स्थापित करने वाले मसीहा के रूप में पेश करते हैं।
- तो इसके ठीक विपरीत जो देश उनकी शर्तों के आगे नहीं झुकते, उनके लिए विनाश की भाषा बोलने से भी नहीं हिचकिचाते। यह उनकी विदेश नीति का सबसे बड़ा और खतरनाक सच है और फिर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है।
