सामाजिक सुरक्षा की ढाल बनी नंदा गौरा योजना: उत्तराखंड में 50 हजार से अधिक कन्याओं को मिला सीधा संबल और आर्थिक संबल।
- उत्तराखंड में बेटियों के सशक्तिकरण, उनकी सामाजिक सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार की ‘नंदा गौरा योजना’ एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित यह योजना आज गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना ने न केवल समाज में बेटियों के प्रति रूढ़िवादी सोच को बदला है, बल्कि उन्हें आर्थिक संबल देकर उच्च शिक्षा की राह भी आसान कर दी है।
क्या है नंदा गौरा योजना और इसके दो चरण?
पूर्ववर्ती ‘नंदा देवी कन्या धन’ और ‘गौरा देवी कन्या धन’ योजनाओं को मिलाकर बनाई गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, पात्र परिवारों की अधिकतम दो बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक दो चरणों में कुल 62,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है:
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प्रथम चरण (जन्म के समय): बालिका के जन्म पर परिवार को 11,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिससे शिशु के पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में मदद मिलती है।
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द्वितीय चरण (12वीं उत्तीर्ण करने पर): इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद आगे की उच्च शिक्षा (स्नातक या डिप्लोमा) में प्रवेश लेने पर अविवाहित छात्रा को 51,000 रुपये का भारी-भरकम संबल दिया जाता है।
यह पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थी या उसकी माता के खाते में पहुंचती है, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त रहती है।
बदल रही है समाज की तस्वीर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में अब तक 50,000 से अधिक बेटियों को इस योजना का सीधा लाभ मिल चुका है। अकेले वर्ष 2026 में ही हजारों नई पात्र छात्राओं और नवजात शिशुओं के परिजनों ने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इसका लाभ उठाया है। इस योजना के ज़मीन पर उतरने से बड़े सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं:
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लिंगानुपात में सुधार: जन्म के समय मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर प्रभावी अंकुश लगा है।
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बाल विवाह पर रोक: 12वीं के बाद मिलने वाली 51,000 रुपये की किश्त के लिए छात्रा का अविवाहित होना और आगे पढ़ना अनिवार्य शर्त है, जिससे कम उम्र में बेटियों की शादी होने की प्रवृत्ति घटी है।
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साक्षरता और उच्च शिक्षा को बढ़ावा: आर्थिक तंगी के कारण बीच में पढ़ाई छोड़ने वाली बेटियां अब बेझिझक कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में दाखिला ले रही हैं।
सरकार का संकल्प: हर बेटी बने आत्मनिर्भर
- योजना की सफलता और बेटियों के उत्थान को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार प्रदेश की हर बेटी को शिक्षा, सम्मान और प्रगति के समान अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से बालिकाओं को उनके जन्म से लेकर पैरों पर खड़े होने तक का संबल दिया जा रहा है, ताकि वे ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकें।
- पर्वतीय और दूरदराज के अंचलों में यह योजना आज बेटियों के सपनों को नए पंख दे रही है, जिससे समाज में एक मजबूत और सकारात्मक संदेश गया है।

